दरअसल, केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में बदलाव कर नई व्यवस्था की थी कि सरकारी मुलाजिम के खिलाफ जांच के लिए उस अफसर के विभागाध्यक्ष से पीसी एक्ट की धारा 17 ए के तहत अनुमति लेनी जरूरी होगी।
इसके बाद विजिलेंस ने वर्तमान में चल रहे मामलों के अलावा किसी भी तरह की शिकायत पर जांच या प्रारंभिक छानबीन के लिए सरकार से अनुमति मांगना शुरू कर दिया। चूंकि, कार्रवाई न होने पर सरकार का संरक्षण मिलने जैसी तस्वीर उभरने लगी थी। बड़ी संख्या में अनुमतियां विभिन्न विभागों में लंबित थीं। इसी के चलते सरकार ने यह बदलाव किया है।