कोरोना संकट के बीच बीते वर्ष चार गुना तक बढ़ाई गई बिजली के नए कनेक्शन की सिक्योरिटी राशि को घरेलू उपभोक्ताओं के लिए घटा दिया गया है। औद्योगिक इकाइयों को पहले के मुकाबले अब एक हजार रुपये अधिक चुकाने होंगे। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने सिक्योरिटी राशि की नई दरों का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। एक माह के भीतर जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं।
सुझाव और आपत्तियां आने के बाद आयोग इसको लेकर जन सुनवाई करेगा। सभी वर्गों से बात करने के बाद नई दरों को अधिसूचित किया जाएगा। राजपत्र में नई दरों के ड्राफ्ट को अधिसूचित किया गया है। आयोग के ड्राफ्ट के अनुसार घरेलू उपभोक्ताओं को शहरी क्षेत्रों में प्रति किलोवॉट 340 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 240 रुपये चुकाने होंगे। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए आयोग ने इन दरों में बीस रुपये की कमी की है। औद्योगिक इकाइयों को प्रति किलोवॉट एक हजार रुपये की जगह दो हजार रुपये चुकाने होंगे।
अस्थायी कनेक्शन की दरों को 850 रुपये की जगह 1750 रुपये किया गया है। जनजातीय क्षेत्रों में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सिक्योरिटी राशि 165 रुपये निर्धारित की गई है। व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए शहरी क्षेत्रों में सिक्योरिटी राशि 600 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 350 रुपये रहेगी। शहरी क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल योजनाओं के लिए सिक्योरिटी राशि को 600 रुपये, ग्रामीण क्षेत्रों में 500 रुपये तय किया गया है।
20 से 50 किलोवॉट वाले उद्योगों के लिए 1250 रुपये, 50 किलोवॉट से अधिक के लिए 1500 रुपये सिक्योरिटी राशि तय की गई है। आयोग के अधिकारियों ने बताया कि सुझाव और आपत्तियां दर्ज होने के बाद हितधारकों से चर्चा की जाएगी। जन सुनवाई का प्रावधान भी रखा गया है। सभी पक्षों को सुनने के बाद नई दरों को अधिसूचित कर दिया जाएगा। बता दें कि यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट ने आयोग को नई दरें तय करने के निर्देश दिए हुए हैं। इसी कड़ी में आयोग ने सोमवार को नई दरों का ड्राफ्ट अधिसूचित कर दिया है।
बीते वर्ष चार गुना की कर दी थी बढ़ोतरी
अक्तूबर 2020 में राज्य बिजली बोर्ड ने घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक कनेक्शनों पर सिक्योरिटी राशि में भारी बढ़ोतरी कर दी थी। घरेलू बिजली कनेक्शन के लिए 360 रुपये प्रति किलोवॉट की जगह 1158 रुपये तय किए थे। औद्योगिक इकाइयों के कनेक्शन प्रति केवीए एक हजार रुपये से बढ़ाकर 4882 रुपये कर दिए थे। इसको लेकर प्रदेश भर में खूब हल्ला हुआ था। दिसंबर में सरकार ने विरोध बढ़ता देख नई दरों के आदेश को वापस ले लिया था।