बारिश पर निर्भर है किसान, बिना पानी खेत हो रहे बेजान
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के साथ लगते जिला परिषद के बढ़ई वार्ड के तहत आने वाली 15 पंचायतों के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे हैं। गांवों तक बनीं सड़कें भी कच्ची हैं। हर चुनाव में लोगों से प्रतिनिधि विकास का वादा करते जाते हैं लेकिन फिर लौटकर नहीं आते।
ग्रामीणों को फल, सब्जी और दूध बेचने के लिए आज भी
पैदल चलकर मुख्य सड़कों तक पहुंचना पड़ता है। इससे न केवल उनका समय और श्रम अधिक लगता है बल्कि उत्पादों की गुणवत्ता तथा उनके दामों पर भी असर पड़ता है। जिला परिषद में बढ़ई वार्ड की हालत आज भी बेहद खराब है। यहां पर अभी भी पंचायतों में पानी के लिए कोई स्कीम उपलब्ध नहीं है। छोटी-छोटी स्थानीय स्कीमों से ग्रामीणों को पानी दिया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस वार्ड में करीब 45 से 50 हजार की जनता रहती है। पीने के पानी के अलावा फल और सब्जियों की सिंचाई के लिए आज भी लोग बारिश पर निर्भर हैं। इसके अलावा बाकी बची कसर जंगली जानवर भी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं।
थड़ी, आनंदपुर और जाठिया देवी में मोर मिर्च की फसलों को खराब कर रहे हैं। इसके अलावा दूसरी ओर कई बार खराब मौसम या आपात स्थिति में सड़कें न होने के कारण मुख्य सड़क तक पहुंचना बेहद कठिन हो रहा है। इससे स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित होती हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार कई वर्षों से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए। किसानों ने मांग की है कि क्षेत्र में जल्द सिंचाई योजनाएं शुरू की जाएं जिससे खेती को स्थिर बनाया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने फसलों के लिए बीमा योजना लागू करने की भी मांग उठाई है। जिला परिषद के बढ़ई वार्ड में कोट, आनंदपुर, शोघी, थड़ी, जलेल, बढ़ई, नेरी, सांगटी-सन्होग, चायली, गिरब-खुर्द, टुटू-मज्ठाई, रामपुर क्योंथल, बागी, धमून और चनोग पंचायतें शामिल हैं।
फसलों को जानवर पहुंचाते हैं नुकसान
किसान जय शिव ठाकुर ने कहा कि बढ़ई वार्ड की अधिकांश पंचायतों में किसान टमाटर, शिमला मिर्च, मूली और धनिया की पैदावार करते है। फसलें अच्छी होंगी तो दाम भी बेहतर मिलते हैं। लेकिन जंगली जानवर नुकसान करते हैं तो किसान को मुश्किलें पैदा होती हैं। अधिकांश लोग इन्हीं साधनों से होने वाली आजीविका पर निर्भर हैं।
पैदल रास्ते तक नहीं
किसान मदन ठाकुर ने कहा कि शहर को सुंदर बनाने के लिए कई प्लान बनाए जाते हैं, लेकिन जिला परिषद के वार्ड की कई पंचायतों में पैदल रास्ते तक नहीं है। कई जगहों पर तो सड़कों को पक्का तक नहीं किया गया है। जंगलों को काटकर नाश किया जा रहा है। अब तो दीया तले अंधेरा वाली स्थिति बन गई है।
गांव से युवा कर रहे पलायन
किसान एचएन शांडिल ने कहा कि गांवों में सड़कों की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस वजह से कई युवा तो गांवों से पलायन तक करने को मजबूर हो रहे हैं। सड़कों को बनाने में एफआरए और एफसीसीए की मंजूरी समय पर नहीं मिल पाती है। इस वजह से विकास कार्य सालों से अटके हैं।