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नौणी विवि में उगाया इटली का जेरोमाइन सेब, दो साल में लगे फल

Sat, 21 Jul 2018 01:38 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोलन
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नौणी विश्वविद्यालय ने इटली के सेब की प्रजाति को सोलन में ईजाद कर लिया है। महज दो साल की अवधि में प्रजाति के पौधों से फल भी निकल आए हैं। समुद्र तल से 1260 मीटर की ऊंचाई पर नौणी विवि के वैज्ञानिकों ने इस प्रजाति को संभाला है और भविष्य में प्रजाति को विकसित करने और नई पौध तैयार करने का काम भी शुरू कर दिया है।

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विश्व बैंक की फंडिंग के माध्यम से सघन खेती को बढ़ावा देने के लिए इटली की छह प्रजातियों को विश्वविद्यालय परिसर में प्रायोगिक तौर पर स्थापित किया गया था। इसमें से जेरोमाइन (एम-9) प्रजाति सबसे सफल साबित हुई है। विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. एचसी शर्मा ने बताया कि प्रयोग सफल रहने के बाद भविष्य में इसका विस्तार किया जाएगा।

इस पौध को विवि में विकसित किया जाएगा और ज्यादा से ज्यादा बागवानों तक पहुंचाने के प्रयास किए जाएंगे। मई 2016 में पौधों को विश्वविद्यालय में स्थापित किया गया था। दो साल में इनमें फल आने शुरू हो गए हैं। ऊंचाई कम होने की वजह से एक हेक्टेयर में चार सौ पौधे लगाए जा सकते हैं और करीब 50 से 55 मीट्रिक टन का उत्पादन एक हेक्टेयर में किया जा सकता है। इटली से आई प्रजातियों में सबसे बेहतर पैरो माइन रही।

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ऐसे करें सेब की पैदावार

जेरोमाइन के अलावा रेड वेलोक्स, रेड कैप वल्टोड, स्कारलेट स्पूर -2, सुपर चीफ, गैल गाला, रेडलम गाला और ऐविल अर्ली फुजी एम 9 और एमएम 106 रूटस्टॉक्स पर ग्राफ्ट करके विकसित की गई हैं। प्रजातियों को भी विश्वविद्यालय परिसर में उगाया गया है। इस मौके पर विशेषज्ञ डॉ. जीएस शर्मा, डॉ. कृष्ण कुमार व डॉ. धर्मपाल शर्मा मौजूद रहे।

 परंपरागत रूप से सीडलींग रूट स्टॉक्स पर तैयार किए सेब के पौधों को 7.5 गुणा 7.5 मीटर की दूरी पर लगाया जाता है। इसमें 178 पेड़ प्रति हेक्टेयर का रोपण किया जाता है और स्पर किस्म के सीडलींग रूट स्टॉक्स को 5.0 गुणा 5.0 मीटर की दूरी पर लगाया जाता है।

इसमें 400 पेड़ प्रति हेक्टेयर का रोपण किया जा सकता है। इन बागों की औसत उत्पादकता लगभग 6 से 8 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर होती है, जो उच्च घनत्व बागानों (40-60 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर) में प्राप्त उत्पादकता से बहुत कम है।
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