जेरोमाइन के अलावा रेड वेलोक्स, रेड कैप वल्टोड, स्कारलेट स्पूर -2, सुपर चीफ, गैल गाला, रेडलम गाला और ऐविल अर्ली फुजी एम 9 और एमएम 106 रूटस्टॉक्स पर ग्राफ्ट करके विकसित की गई हैं। प्रजातियों को भी विश्वविद्यालय परिसर में उगाया गया है। इस मौके पर विशेषज्ञ डॉ. जीएस शर्मा, डॉ. कृष्ण कुमार व डॉ. धर्मपाल शर्मा मौजूद रहे।
परंपरागत रूप से सीडलींग रूट स्टॉक्स पर तैयार किए सेब के पौधों को 7.5 गुणा 7.5 मीटर की दूरी पर लगाया जाता है। इसमें 178 पेड़ प्रति हेक्टेयर का रोपण किया जाता है और स्पर किस्म के सीडलींग रूट स्टॉक्स को 5.0 गुणा 5.0 मीटर की दूरी पर लगाया जाता है।
इसमें 400 पेड़ प्रति हेक्टेयर का रोपण किया जा सकता है। इन बागों की औसत उत्पादकता लगभग 6 से 8 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर होती है, जो उच्च घनत्व बागानों (40-60 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर) में प्राप्त उत्पादकता से बहुत कम है।