राज्यपाल ने पदमश्री सुभाष पालेकर के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि वह वर्तमान समय के संत है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन किसान समुदाय के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि हिमाचल की कृषि भूमि अन्य प्रदेशों से अधिक उपजाऊ है।
प्राकृतिक खेती के तहत ‘जीवामृत’ और ‘गांजीवामृत’ का उपयोग कर जमीन सोना उगलेगी। आचार्य देवव्रत ने कहा कि किसानों को रासायनिक खेती में रुचि नहीं है, क्योंकि यह जहरीली है और वे जैविक खेती को भी नहीं अपना रहे हैं।
क्योंकि यह महंगी होने के साथ-साथ भरोसेमंद भी नहीं है। अब प्राकृतिक खेती एकमात्र विकल्प है, क्योंकि इसमें किसानों को एक भी पैसा खर्च नहीं करना पड़ता और इसके अनेक लाभ हैं।
इस अवसर पर पदमश्री सुभाष पालेकर, शून्य लागत प्राकृतिक खेती के परियोजना निदेशक राकेश कंवर, कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कुलपति प्रो. अशोक सरयाल, कृषि निदेशक डॉ. देश राज शर्मा, पुलिस अधीक्षक कांगड़ा संतोष पटियाल समेत अन्य गण्यमान्य व्यक्ति व छह जिलों के किसान उपस्थित थे।