सिंह ने कहा कि देश की आजादी के बाद जितने पानी के चश्मे देश में थे, उसमें से 50 प्रतिशत सूख गए हैं या फिर उद्योग और विकास की चपेट में आकर खत्म हो गए हैं। कहा कि जलवायु परिवर्तन से बारिश के समय बदलाव होने से सबसे ज्यादा नुकसान प्राकृतिक जल स्रोतों को हो रहा है।
इससे अब वे पूरा साल पानी देने की बजाय सिर्फ एक सीजन में ही पानी छोड़ रहे हैं। पहाड़ी क्षेत्र में वाटर शेड योजना पर और गति से काम किया जाएगा। इससे पहले कार्यशाला के शुभारंभ सत्र में केंद्रीय भूतल जल बोर्ड के चेयरमैन केसी नाइक, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के अतिरिक्त प्रधान सचिव संजय कुंडू, सर्वे
ऑफ इंडिया के सामान्य सर्वेक्षक लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कुमार, आईपीएच विभाग हिमाचल के सचिव ओंकार चंद शर्मा सहित केंद्रीय और राज्य एजेंसियों, सिविल सोसायटियों, विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञों सहित अन्य प्रतिनिधियों ने भाग लिया।