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NH-21 का ये सच जानकर दंग रह जाएंगे आप

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विश्वविख्यात पर्यटन नगरी मनाली जाने वाले नेशनल हाईवे -21 पर सफर खतरे से खाली नहीं है। चंडीगढ़ से मनाली जा रहा यह हाईवे वाहन चलने योग्य नहीं है। स्वारघाट से नेरचौक तक 103 किलोमीटर इस सड़क की हालत बेहद खस्ता है। गड्ढों में बदल चुके हाईवे किनारे न तो रेलिंग है और न ही सुरक्षा के अन्य कोई इंतजाम।
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स्टेट नोडल रोड सेफ्टी ऑडिटर ने प्रदेश के इस सबसे व्यस्त हाईवे की मौजूदा स्थिति पर कई सवाल खड़े किए हैं। रोड सेफ्टी ऑडिटर ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी को बाकायदा पत्र लिखकर एनएच 21 को सुधारने के लिए कहा है।

चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे-21 प्रदेश का सबसे व्यस्त सड़क मार्ग है। इस पर प्रतिदिन 30 हजार से अधिक वाहन चलते हैं, लेकिन इन दिनों यह मार्ग किसी भी नजरिए से नेशनल हाईवे नजर नहीं आ रहा है।
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सीमेंट प्लांटों ने बिगाड़ी स्थिति

एनएचएआई को दी रिपोर्ट में रोड सेफ्टी ऑडिटर ने कहा है कि मरीजों को इस सड़क से ले जाना खतरे से खाली नहीं। रिपोर्ट में एनएच की इस बदहाली को लारजी हादसे से भी जोड़ा गया है। कहा है कि एनएच की स्थिति ठीक न होने से यहां हादसे होने की संभावना है। इस सड़क पर हुए हादसों का भी रिपोर्ट में जिक्र किया गया है।

इस हाईवे पर सीमेंट के तीन प्लांट लगे हैं। प्रतिदिन इन प्लांटों से 8 से 10 हजार सीमेंट से लदे ट्राले बाहर निकलते हैं। ये ट्राले कहीं न कहीं इस एनएच को क्षतिग्रस्त कर रहे हैं। हिमाचल की सड़कें 9 टन भार के लिए पास हैं। बावजूद इसके सड़कों पर निर्धारित भार से भी अधिक वाहनों को चलाया जा रहा है।
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करोड़ों खर्च करने के बाद भी खस्ताहाल

चंडीगढ़-मनाली एनएच-21 में करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी कोई सुधार नहीं हो पाया है। हालांकि, कुछ समय पहले एनएच का मरम्मत कार्य किया गया, लेकिन बरसात के मौसम में एनएच की टारिंग पूरी तरह से उखड़ गई है।

पिछले साल बिलासपुर से स्वारघाट तक करीब एक करोड़ रुपये और घागस से नेरचौक तक 28 लाख रुपये खर्च किए गए। कई अन्य स्थानों पर भी मरम्मत कार्य किया गया। हाईवे की स्थिति को देख पर्यटक अब वाया ऊना हो हिमाचल आ रहे हैं।

एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सतीश कौल ने कहा कि स्टेट नोडल रोड सेफ्टी ऑडिटर की ओर से पत्र मिला है। उसके बाद एनएच की मरम्मत की जा रही है। एनएच सवारघाट-नेरचौक को सुधारा जा रहा है। पहले से इसकी स्थिति ठीक कर दी गई है।
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