नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने जंगल में कचरे की अवैध डंपिंग पर कड़ा संज्ञान लिया है। ट्रिब्यूनल ने हमीरपुर के दुघनेरी गांव से कचरा हटाने के लिए आदेश दिए हैं और कार्रवाई रिपोर्ट तलब की है। मामले की सुनवाई 1 नवंबर को होगी। शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव ने ट्रिब्यूनल को बताया कि 15 मार्च, 2023 को हमीरपुर नगर परिषद ने सुनतान लाइफ कंपनी के साथ कचरे के निस्तारण के लिए अनुबंध किया। 4 अप्रैल, 2023 को कचरे का निस्तारण शुरू कर दिया। 2 जुलाई तक 3121.54 टन कचरे का निस्तारण किया गया। प्रधान सचिव ने ट्रिब्यूनल को बताया कि कचरे को ठिकाने लगाने के लिए कम से कम नौ महीनों का समय लगेगा। ट्रिब्यूनल को यह भी बताया कि कचरे को वन भूमि में एकत्रित किया जा रहा है। ट्रिब्यूनल ने वन विभाग को आदेश दिए कि वन भूमि पर न तो किसी तरह का अवैध कब्जा होने दें और न ही जंगलों में कचरे की डंपिंग की जाए।
इसी वर्ष अप्रैल में ट्रिब्यूनल ने स्थानीय निवासी रीता शर्मा की शिकायत का निपटारा करते हुए कचरे को ठिकाने लगाने के आदेश दिए थे और रिपोर्ट तलब की थी। प्रधान सचिव शहरी विकास के शपथपत्र से आश्वस्त होकर ट्रिब्यूनल ने शिकायत को बंद कर दिया था। शिकायत की गई थी कि खुले में कचरा जलाने के कारण दुघनेरी गांव के लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। आसपास का वातावरण दूषित हो गया है। लोगों में बीमारी बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। पत्र पर संज्ञान लेते हुए ट्रिब्यूनल ने प्रधान सचिव शहरी विकास से जवाब तलब किया था। प्रधान सचिव ने ट्रिब्यूनल को बताया कि ठोस कचरा संयंत्र को पक्की दीवार के घेरे में लिया गया है। इसके लिए 25 लाख खर्चे गए हैं। इसके अलावा संयंत्र तक सड़क, जाली और बाड़े पर 20 लाख रुपये खर्च किए हैं। कचरे को ठिकाने लगाने के लिए चार आधुनिक मशीनें लगाई हैं। ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार को आदेश दिए थे कि कचरे को वैज्ञानिक तरीके से ठिकाने लगाने के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार किया जाए। कचरे से निपटने के लिए शीघ्रता से उपचारात्मक कदम उठाने के आदेश दिए थे।