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पहाड़ों को कंकरीट के जंगलों में बदलने की इजाजत नहीं दी जा सकती: एनजीटी

Sat, 18 Nov 2017 04:06 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हिमाचल प्रदेश में विकास के चलते लगातार हो रहे पर्यावरणीय विनाश पर चिंता और कड़ी नाराजगी जाहिर की है। पीठ ने कहा है कि पहाड़ों को कंकरीट के जंगलों में तब्दील करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
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लगातार बढ़ रही आबादी का बोझ और अंधाधुंध निर्माण न सिर्फ पर्यावरण को क्षति पहुंचा रहा है, बल्कि एक बड़ी आपदा को भी दावत दे रहे हैं। सोच-समझ कर विकास होना चाहिए। इसलिए सरकार तीन महीने में शिमला के लिए डेवलपमेंट प्लान तैयार करे।

एनजीटी ने हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के भवन विस्तार के लिए हरित क्षेत्र में निर्माण पर रोक लगा दी। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने फैसले में कहा कि आयोग ने जगह की कमी के चलते नई आधुनिक लाइब्रेरी, बच्चों के लिए सुविधा केंद्र, साक्षात्कार कक्ष, पार्किंग के लिए अतिरिक्त निर्माण की मांग की थी।
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कहा- ऐसी एक भी वजह नहीं कि निर्माण की अनुमति दी जाए

आवेदक की आपत्ति थी कि जहां निर्माण किया जाना है वह हरित या जंगल क्षेत्र है। इसकी तस्वीरें भी सबूत के तौर पर पेश की गईं थीं। पीठ ने याची की आपत्ति व अन्य तथ्यों को आधार बनाते हुए कहा कि ऐसी एक भी वजह नहीं है कि निर्माण की अनुमति दी जाए।

यहां तक कि तमाम सरकारी कार्यालय हरित क्षेत्र या जंगलों को ही अपना ठिकाना बना रहे हैं। इससे पर्यावरण और पारिस्थितिकी को काफी नुकसान है। इसलिए निर्माण की इजाजत नहीं दी जा सकती। आयोग को किसी दूसरी जगह पर निर्माण कार्य करना चाहिए।

पीठ ने कहा है कि राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकरण पूर्ण व विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर यह सुनिश्चित करें कि सूबे में कूड़ा-कचरा प्रबंधन और सीवेज शोधन की व्यवस्था मुकम्मल हो।

इसके अलावा हरित क्षेत्रों या ऐसे प्रतिबंधित क्षेत्र जहां पुराने मकान मौजूद हैं उनके विस्तार या नए निर्माण के विषय में सुपरवाइजरी समिति के पास ही आवेदन करें।

किसी भी नदी, जलाशय में न हो सीवेज का प्रवाह

पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि किसी भी नदी, जलाशय में सीवेज का प्रवाह किसी भी सूरत में नहीं जाना चाहिए। सीवेज शोधन संयंत्र व पाइपलाइन व्यवस्था को ठीक कर सीवेज का शोधन किया जाना चाहिए।

पीठ ने इसके लिए भी तीन महीनों में कार्ययोजना तैयार करने का आदेश दिया है। पीठ ने कहा कि हरित क्षेत्र या जंगल के किनारे जिनके घर या मकान व जमीन हैं यह उनकी भी जिम्मेदारी है कि उनके घर व आसपास के पेड़-पौधे बचे रहें।
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आपदा प्रबंधन के लिए बनाएं प्रभावी कार्ययोजना

पीठ ने राज्य सरकार, संबंधित विभागों और स्थानीय प्राधिकरणों को आदेश दिया है कि वे आपदा प्रबंधन के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करें। कार्ययोजना में पूर्व बचाव और राहत पर जोर दिया जाना चाहिए।

ताकि किसी भी तरह की अनहोनी और प्राकृतिक आपदा से कम से कम नुकसान प्राकृतिक संसाधनों, व्यक्तियों और संपत्तियों को हो। राहत और बचाव के संबंध में भी पूर्व तैयारी होनी चाहिए।
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