नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने शिमला शहर में हरे पेड़ों के कटान पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। एनजीटी ने यह प्रतिबंध प्रार्थी पूनम गहलोत की याचिका पर नई दिल्ली में सुनवाई करने के बाद लगाया। ट्रिब्यूनल के इन आदेशों से नगर निगम क्षेत्र के तहत हाल ही में दी गई हरे पेड़ों को काटने की परमिशन पर रोक लग गई है।
एनजीटी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि ट्रिब्यूनल की इजाजत के बगैर शिमला नगर निगम परिक्षेत्र में किसी भी पेड़ को न काटा जाए। यदि किसी पेड़ को काटना निहायत ही जरूरी हो जाए तो उसे काटने की मंजूरी के लिए संबंधित विभाग ट्रिब्यूनल के समक्ष आवेदन कर सकता है। प्रार्थी का आरोप है कि शिमला शहर में नगर निगम की ट्री अथॉरिटी और वन विभाग ने बिना किसी ठोस आधार के सैकड़ों की संख्या में हरे पेड़ों को काटने की इजाजत दे दी।
प्रार्थी का कहना है कि जान और माल को खतरा बने पेड़ों की आड़ में नगर निगम व वन विभाग ने करीब 287 पेड़ काटने की परमिशन जारी कर दी। इन पेड़ों को काटने की मंजूरी नियमों को ताक पर रखकर दे दी गई। साल 2014 में 202 पेड़ों को काटने की मंजूरी भी बिना तार्किक आधार के दी गई थी जिसे हिमाचल हाईकोर्ट ने खारिज करते हुए नए सिरे से खतरा बने पेड़ों को काटने की इजाजत हेतु पुनर्निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करने को कहा था।