नेशनल अकादमी ऑफ साइंसेज इंडिया का कहना है कि अजय शर्मा के दावे विज्ञान की दिशा बदलने वाले हैं।
आर्किमिडीज, न्यूटन और आइंस्टीन के सिद्धांतों को चुनौती देने वाले हिमाचल के वैज्ञानिक अजय शर्मा की मेहनत रंग ला रही है। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने उनके शोध कार्य को नेशनल अकादमी ऑफ साइंसेज इंडिया इलाहाबाद को भेज दिया है। अब देश के सर्वोच्च वैज्ञानिक जांच करेंगे कि अजय शर्मा के इन दावों में कितना दम है।
उधर, नेशनल अकादमी ऑफ साइंसेज इंडिया का कहना है कि अजय शर्मा के दावे विज्ञान की दिशा बदलने वाले हैं। इसलिए इन दावों की गंभीरता से जांच कराई जा रही है। इसके लिए भौतिकी के बड़े वैज्ञानिकों से मदद ली जा रही है। उनसे और पेपर मांगे गए हैं।
अजय शर्मा की इस खोज को ‘अमर उजाला’ समय-समय पर प्रमुखता से उजागर करता आया है। शर्मा यहां सहायक निदेशक शिक्षा के पद पर तैनात हैं। उनकी 34 वर्ष की मेहनत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है
क्या हैं वैज्ञानिक अजय शर्मा के दावे
वैज्ञानिक अजय शर्मा की दो पुस्तकें इंग्लैंड के कैंब्रिज से प्रकाशित हो चुकी हैं।
अजय शर्मा ने अमेरिका यूरोप से प्रकाशित शोध पत्रों में 2266 वर्ष पुराने आर्किमिडीज के सिद्धांत, 331 वर्ष पुराने न्यूटन के नियमों और आइंस्टीन के पदार्थ-ऊर्जा समीकरण का संशोधन किया है। अजय शर्मा की दो पुस्तकें ‘बियोंड न्यूटन एंड आर्किमिडीज’ और ‘बियोंड आइंस्टीन एंड e=mcw’इंग्लैंड के कैंब्रिज से प्रकाशित हो चुकी हैं।
ये पुस्तकें शर्मा के शोधपत्रों पर आधारित हैं। अजय के न्यूटन आइंस्टीन और आर्किमिडीज पर शोध को नेशनल अकादमी ऑफ साइंसेज इंडिया इलाहाबाद में जांचा जा रहा है। नेशनल अकादमी ऑफ साइंसेज इंडिया के कार्यकारी सचिव ने इस बात की पुष्टि की है।
भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार अकादमी के मेंबर और फैलो अजय के शोध की जांच कर रहे हैं। अजय शर्मा जून 2015 में साइंस एंड टेक्नोलॉजी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से मिले थे और उन्होंने पुस्तकों के मूल्यांकन की प्रार्थना भी की थी।
वैज्ञानिक अजय शर्मा के दावे
महान न्यूटन ने नहीं दिया था गति का दूसरा नियम
अधूरा है न्यूटन का गति का तीसरा नियम
2265 वर्ष पुराने आर्किमिडीज सिद्धांत भी अधूरा