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स्मृति शेष: सोनिया गांधी की सुरक्षा में तैनात रहे कमांडो से चार बार के विधायक तक, ऐसा रहा नंद लाल का सफर

Tue, 03 Nov 2026 12:47 PM IST
Ankesh Dogra न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

हिमाचल प्रदेश के रामपुर के विधायक नंद लाल का जीवन सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। कभी वह सोनिया गांधी की सुरक्षा में एसपीजी कमांडो के रूप में तैनात थे, लेकिन वर्ष 2007 में सरकारी सेवा छोड़कर राजनीति में आ गए। इसके बाद उन्होंने लगातार चार विधानसभा चुनाव जीतकर रामपुर में अपनी राजनीतिक पहचान बनाई।
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एसपीजी कमांडो से बने चार बार के विधायक - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश की राजनीति में रामपुर के दिवंगत विधायक नंद लाल की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में रही, जिन्होंने सुरक्षा बल की नौकरी से निकलकर राजनीति में अपनी अलग जगह बनाई। उनके जीवन का एक दिलचस्प पहलू यह भी रहा कि वह कभी कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की सुरक्षा में तैनात कमांडो रह चुके थे।

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नंद लाल ने करीब 22 साल तक सुरक्षा सेवाओं में जिम्मेदारी निभाई। इसके बाद वर्ष 2007 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर उन्होंने चुनावी राजनीति में कदम रखा। रामपुर से लगातार चार विधानसभा चुनाव जीतकर उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा को नई पहचान दी।

1985 में एसपीजी से जुड़े, सोनिया गांधी की सुरक्षा में रहे तैनात
नंद लाल का जन्म 16 अप्रैल 1954 को शिमला जिले के रामपुर बुशहर क्षेत्र के देवठी गांव में हुआ था। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की थी।
 

शिक्षा पूरी करने के बाद वह भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में शामिल हुए और कमांडो दल में सेवाएं दीं। उनकी प्रतिभा और सेवाओं के चलते वर्ष 1985 में उन्हें विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) में शामिल किया गया।

एसपीजी में रहते हुए उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री और पूर्व प्रधानमंत्रियों की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाईं। वह सोनिया गांधी की सुरक्षा टीम में भी कमांडो के रूप में तैनात रहे। नंद लाल वर्ष 1985 से 1997 तक एसपीजी में रहे। इस दौरान उन्होंने देश के कई महत्वपूर्ण आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था में भी योगदान दिया।

राजीव गांधी और चंद्रशेखर से मिला प्रशंसा पत्र
नंद लाल की सेवाओं को तत्कालीन प्रधानमंत्रियों राजीव गांधी और चंद्रशेखर ने भी सराहा था। उन्हें दोनों नेताओं की ओर से उत्कृष्ट सेवाओं के लिए प्रशंसा पत्र मिले थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों में आईटीबीपी बटालियन की कमान भी संभाली। सुरक्षा क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक से भी सम्मानित किया गया था।
 

2007 में वर्दी छोड़कर चुनावी मैदान में उतरे
सुरक्षा बल में लंबा समय बिताने के बाद नंद लाल ने वर्ष 2007 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने का फैसला किया। इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें रामपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारा। उनकी उम्मीदवारी भी उस समय चर्चा में रही, क्योंकि वह सीधे सुरक्षा सेवाओं से राजनीति में आए थे। उन्होंने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कर राजनीतिक सफर की शुरुआत की।

चार बार लगातार जीता रामपुर का चुनाव
नंद लाल ने वर्ष 2007 में पहली बार रामपुर विधानसभा सीट से जीत हासिल की। इसके बाद 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भी वह लगातार विजयी रहे। इस तरह उन्होंने चार बार रामपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2013 में उन्हें मुख्य संसदीय सचिव बनाया गया। बाद में उन्होंने विधानसभा की विभिन्न समितियों में भी जिम्मेदारियां निभाईं। मार्च 2024 में प्रदेश सरकार ने उन्हें सातवें राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था। इस पद के साथ उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी मिला था।
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3 नवंबर को हुआ निधन, पीछे छोड़ गए लंबा सफर
रामपुर की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे नंद लाल का 3 नवंबर 2026 को 72 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके जीवन की कहानी में सुरक्षा बल की कठिन जिम्मेदारियों से लेकर राजनीति के लंबे सफर तक कई महत्वपूर्ण पड़ाव रहे। सोनिया गांधी की सुरक्षा में कमांडो के रूप में सेवाएं देने वाले नंद लाल ने बाद में रामपुर की जनता के बीच अपनी राजनीतिक पहचान बनाई। उनका सफर इस मायने में भी उल्लेखनीय रहा कि उन्होंने सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद सार्वजनिक जीवन में नई भूमिका अपनाई और लगातार चार बार विधानसभा तक पहुंचे।
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