नाहन शहर को राजा कर्म प्रकाश ने लगभग 400 साल पहले बसाया था। उस दौरान नाहन सिरमौर रियासत की राजधानी कहलाई जाने लगी। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान वर्ष 1868 में सिरमौर में म्यूनिसपल बोर्ड बनाया गया जिसे वर्ष 1889 में कमेटी का दर्जा दे दिया गया।
तब इसमें कुल नौ वार्ड थे। इनमें से चार इलेक्टिड और पांच नोमिनेटिड होते थे। इस बोर्ड का कार्यकाल तीन वर्ष का होता था। जबकि रियासत के महाराजा बोर्ड के अध्यक्ष बने। वर्ष 1934 में भी इसके नौ सदस्य थे।
जिनमें तीन नोमिनेटिड और छह इलेक्टिड हुआ करते थे। उस दौरान भी अध्यक्ष नोमिनेटिड हुआ करता था। हालांकि, उपाध्यक्ष का पद इलेक्टिड प्रणाली से चुनने की प्रथा शुरू की गई।
पुस्तकों में दूसरी नगर परिषद का जिक्र
पूर्व विधायक एवं राजवंशज अजय बहादुर कहते हैं कि उस दौरान कमेटी को चुंगी और वनों से राजस्व प्राप्त होता था। आमदनी और खर्चा बराबर रहता था। पूरी आमदनी शहर के विकास पर खर्च की जाती थी। सिरमौर की अंडरग्राउंड सीवरेज प्रणाली आज भी अंग्रेजों के जमाने की चल रही है। रणजोर सिंह की तारीख-ए-रियासत पुस्तक में भी इसका जिक्र है। जबकि टीएस नेगी की सिरमौर गेजेटिर में भी यह अंकित हैं।