डॉ. यशवंत सिंह परमार मेडिकल कॉलेज नाहन में व्हील चेयर को उठाकर एमबीबीएस की कक्षा तक छात्र को पहुंचाने का मामला मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया तक पहुंच गया है। मेडिकल साइंस युनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस और गुरू तेग बहादुर अस्पताल दिल्ली के चिकित्सक एवं दिव्यांग अधिकार कार्यकर्ता डॉ. सत्येंद्र सिंह ने एमसीआई के अध्यक्ष को लिखित पत्र भेजा है।
गौरतलब है कि नाहन मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे रोहित कुमार को व्हील चेयर समेत उठाकर कक्षाओं तक पहुंचाया जाता है। जिससे उन्हें दिक्कतें हो रही हैं। कॉलेज में रैंप नहीं होने की वजह से यह समस्या आ रही है। एमबीबीएस के छात्र रोहित कुमार के पिता बीएन प्रसाद ने इस संदर्भ में प्रधानाचार्य, उपायुक्त से लेकर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक पत्र भेजे।
लेकिन, कॉलेज में छात्र को सुविधा देने के लिए प्रयास नहीं हुए। गत दिवस कॉलेज पहुंचे शिक्षा मंत्री विपिन परमार के समक्ष भी पिता ने यह मामला उठाया। अब एमसीआई के अध्यक्ष, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग हिमाचल के मुख्य सचिव समेत अन्य कई विभागों के अधिकारियों को भेजे लिखित पत्र में सत्येंद्र सिंह ने कहा है कि एमसीआई की गाइड लाइन के अनुसार अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में अनिवार्य रूप से रैंप होना चाहिए है।
उनके अनुसार इस संदर्भ में उन्होंने चार वर्ष पूर्व राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के न्यायालय मुख्य आयुक्त निशक्तजन से यह मामला उठाया था। उनकी याचिका के आधार पर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने देश में सभी चिकित्सा संस्थानों को ऐसे विद्यार्थियों की सुविधाएं जुटाने के निर्देश दिए थे।
एमसीआई ने मानक आकलन फॉर्म में संशोधन कर इसके लिए कॉलेज प्रबंधन की जिम्मेवारी तय की। उन्होंने कहा कि व्हील चेयर पर उठाकर ले जाना घातक है। इससे वह चोटिल भी हो सकता है। लिहाजा, इसके विशेष प्रबंध किए जाने चाहिए। उन्होंने एमसीआई से मांग की है कि इस बारे में जवाब तलबी करते हुए उचित कार्रवाई अमल में लाई जाए।
क्या कहते हैं अधिकारी
डॉ. यशवंत सिंह परमार मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. जय श्री शर्मा ने बताया कि हम से जितना बन सकता है, उतनी सहायता छात्र की की जा रही है। कॉलेज में रैंप निर्माण का प्रपोजल भेजा गया है। जिला प्रशासन से भी इस पर बात की गई है।