शिमला नागरिक सभा के अधिवेशन में एलान
सरकार की जनविरोधी नीतियों से लोग परेशान : सिंघा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। कालीबाड़ी हॉल में मंगलवार को शिमला नागरिक सभा का अधिवेशन हुआ। अधिवेशन में तय हुआ कि नगर निगम चुनाव में भाजपा को हराने के लिए लोगों, प्रगतिशील संगठनों और दलों के साथ मिलकर शिमला नागरिक सभा मोर्चा का गठन किया जाएगा। शिमला नागरिक सभा के संयोजक संजय चौहान ने अधिवेशन में यह बात कही। बताया कि पंद्रह अप्रैल तक वार्ड और मोहल्ले स्तर पर कमेटियों का गठन किया जाएगा। सभा जनता के मुद्दों पर संघर्ष करेंगी।
शिमला नागरिक सभा का अधिवेशन दोपहर बाद शुरू हुआ। विधायक राकेश सिंघा भी अधिवेशन में मौजूद रहे। अधिवेशन में बताया गया कि शहर में भाजपा सरकार की नीतियों के द्वारा कूड़े की फीस में लगातार वृद्धि की जा रही है। वहीं पानी और बिजली का निजीकरण किया जा रहा है। आम जनता, सरकार की जनविरोधी नीतियों से परेशान है। इस कारण शहर में अब केवल अमीर व साधन संपन्न लोगों के लिए ही रहने योग्य बना गया है। सिंघा ने कहा कि रोजगार के संकट के से रोजमर्रा के खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। बैठक में यह भी बताया कि पूर्व नगर निगम द्वारा लाई गई विभिन्न परियोजनाओं जिसमें स्मार्ट सिटी, अम्रुत, विश्व बैंक की पेयजल और सीवरेज की परियोजना, टुटीकंडी से मालरोड के लिए रोपवे, तहबाजारी के लिए आजीविका भवन, शहरी गरीब के लिए आवास, पार्किंग और अन्य परियोजनाओं को आज तक पूर्ण नहीं हो पाई है। नगर निगम की इस लचर कार्यशैली से शहर का विकास का पहिया थम गया है।
अधिवेशन में जगत राम, बालक राम, रमन, विजय कौशल, फालमा चौहान, सोनिया सबरवाल, दर्शन सिंह, अनिल ठाकुर, अमित, कुलदीप सिंह, सत्यवान, गोविंद चितरांटा, जगमोहन, ओंकार शाद, राजिन्द्र चौहान, अमीन, महफूज मलिक, महेश वर्मा, रजनी, नितेश, रुक्सार, जियानंद, रीना तंवर, रंजीव कुठियाला, कुंदन, हेमराज चौधरी, सतीश, प्रकाश, सीमा, राम प्रकाश, किशोरी, पूनम सोहटा, गुरदीप कौर, सुषमा, मीरा, राजकुमारी, शारदा, दीपा, हिम्मी, रामाकांत मिश्रा, सुरेंद्र, पूर्ण और राकेश मौजूद रहे।
इन मुद्दों को लेकर होगा संघर्ष
अधिवेशन में कहा कि शहर को नशा मुक्त करने के लिए वार्ड स्तर पर कमेटियों का गठन करें। पानी और कूड़े उठाने की दरों में हर वर्ष 10 प्रतिशत की वृद्धि वापस लेने की मांग की गई। निजी स्कूलों में फीस वृद्धि पर रोक और आईजीएमसी तथा डीडीयू अस्पताल में सीटी तथा एमआरआई टेस्ट की लंबी तारीखों से निजात दिलाने को लेकर संघर्ष किया जाएगा। इसके अलावा बस में न्यूनतम किराया 2 रुपये करने के मुद्दे और पुरानी पेंशन योजना बहाल के मुद्दे को लेकर संघर्ष किया जाएगा।