महापौर सुरेंद्र चौहान ने दो दिवसीय कार्यशाला में उठाई मांग
कहा, महंगे विकास के लिए समाधान जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। देश के पहाड़ी शहरों को आपदा और जलवायु परिवर्तन के चलते आ रही चुनौतियों से उबारने के लिए अलग बजट प्रावधान की जरूरत है। एराइज सिटीज फोरम की ओर से दिल्ली में करवाए सम्मेलन में शिमला के मेयर सुरेंद्र चौहान ने यह मांग उठाई। महापौर ने कहा कि पहाड़ी इलाकों में निर्माण लागत अधिक होती है। वहीं परिवहन व्यवस्था भी खर्चीली है, ऐसे में विकास के लिए विशेष आर्थिक सहायता अनिवार्य है।
एराइज सिटीज फोरम की ओर से दिल्ली में करवाए दो दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के राज्य मंत्री तोखन साहू ने किया। देशभर के 200 के करीब महापौर और आयुक्तों ने हिस्सा लिया। नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि शिमला जैसे पहाड़ी शहरों को बरसात और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से हर साल भारी नुकसान उठाना पड़ता है। आपदा के बाद बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। केंद्र से मांग की कि पहाड़ी नगर निकायों को अतिरिक्त वित्तीय सहयोग दिया जाए। इस दौरान पर्यावरण को बचाने के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। कहा कि वन संरक्षण योजना के तहत हर साल पांच हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा कचरा उठाने के लिए अब बिजली से चलने वाले वाहन प्रयोग में लाए जा रहे हैं, ताकि ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ा जा सकें। इस अवसर पर नगर निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री भी मौजूद रहे।