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ईद पर मुस्लिमों ने हिंदू श्रद्धालुओं की मदद कर पेश की सांप्रदायिक सौहार्द की मिशाल

Thu, 23 Aug 2018 06:00 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंबा
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बकरीद पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मणिमहेश यात्रा पर आए श्रद्धालुओं की मुश्किल में मदद कर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश की है। मामला चंबा का है। आंध्र प्रदेश से मणिमहेश यात्रा पर आए नौ लोग यात्रा के अंतिम पड़ाव पर सामान और पैसा चोरी होने के कारण मुसीबत में फंस गए।

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जैसे-तैसे ये श्रद्धालु चंबा पहुंचे तो वहां ईद की नमाज अदा करने आए समुदाय के लोगों ने आपसी सहयोग से पैसा एकत्रित कर श्रद्धालुओं को 22 हजार रुपये की मदद दी। इसके बाद ही श्रद्धालु अपने घर लौट सके।

जानकारी के अनुसार नौ सदस्यीय श्रद्धालुओं का दल आंध्र प्रदेश से मणिमहेश यात्रा के लिए चंबा पहुंचा था। एक पुरुष और नौ महिला श्रद्धालुओं का यह दल मणिमहेश यात्रा के अंतिम पड़ाव धनछौ पहुंचा तो पैसों समेत उनका सामान चोरी हो गया।
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सभी श्रद्धालु उम्रदराज थे। पैसा एवं सामान चोरी होने के कारण इन बुजुर्गों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। चार दिन पूर्व चोरी हुई चोरी की घटना से परेशान ये श्रद्धालु बुधवार को किसी तरह चंबा चौगान तक पहुंचे। चंबा में बकरीद पर मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा करने पहुंचे थे।

इसी दौरान कुछ नमाजियों के साथ बातचीत में मुसीबत में फंसे श्रद्धालुओं की आपबीती साझा हुई। इसके बाद देखते ही देखते नमाजियों ने आपसी सहयोग से 22 हजार रुपये की रकम जमा कर ली और हिंदू श्रद्धालुओं को उक्त राशि भेंट की, जिसके बाद श्रद्धालु वापस घर जा सके।

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प्रशासन से लगाई गुहार, नहीं मिली पूरी मदद

पीड़ित बुजुर्गों ने बताया कि चौगान जाने से पूर्व वे जिला प्रशासन के समक्ष पेश हुए थे। घर वापसी के लिए उन्होंने 25 हजार रुपये की जरूरत बताई थी। प्रशासन ने उन्हें पांच हजार रुपये की राशि सहायता स्वरूप प्रदान की।

चौगान पर हिंदू श्रद्धालुओं की मदद पर दिलदार अली बट ने बताया कि घटना का पता चलते ही उन्होंने और सहयोगियों ने पैसा जुटाकर श्रद्धालुओं को सौंपा।डीसी चंबा हरिकेश मीणा ने बताया कि कोई बुजुर्ग उनसे मिलने नहीं पहुंचा था।

दो-तीन दिन पूर्व भरमौर में स्थानीय प्रशासन ने इन लोगों की दस हजार रुपये की मदद अपने स्तर पर की थी। चंबा में दो दिन तक रुकने के बावजूद पीड़ितों का उनसे नहीं मिल पाना हैरत की बात है। इस मामले की पड़ताल कराई जा रही है। चंबा के बाशिंदों ने यदि बाहरी राज्यों के लोगों की मदद की है, तो ये काबिले तारीफ है।
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