केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की स्मार्ट सिटी को लेकर जारी सूची पर शिमला शहर के मेयर और डिप्टी मेयर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मेयर संजय चौहान और डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश का शहरी विकास विभाग प्रदेश उच्च न्यायालय से करारी हार खाने के बाद भी प्रदेश में स्मार्ट सिटी के चुनाव के लिए शहरों के आंकड़ों में हेरफेर करने में लगा हुआ है।
यदि हिमाचल सरकार ने शिमला को चयनित कर स्मार्ट सिटी के लिए नाम भेजा होता तो आज देश की प्रथम 20 स्मार्ट सिटी में शिमला का नाम आ गया होता। यह हमारा दावा है। क्योंकि जेएनएनयूआरएम के समय भी शिमला का चयन पहले पहल ही हो गया था।
शहरी विकास विभाग और शहरी विकास मंत्री दोनों को ये मान लेना चाहिए कि जारी सूची धर्मशाला को लेकर उनकी हार है, क्योंकि वास्तविक तौर पर शिमला ही इसके लिए सभी तरह से योग्य शहर था।
शिमला शहर ने हाल ही में विविध आंकड़े पेश कर शहरी विकास योजनाएं शहरी स्वच्छता योजना, व्यापक यातायात योजना, सोलर सिटी योजना, ग्रीन हाउस गैस इन्वेंटरी सिटी रिसिलियेन्स इंडेक्स जैसी योजनाओं को दिया है।
ये सभी स्मार्ट सिटी में स्थान बनाने के लिए भारत सरकार के नियमों के तहत आधार हैं। महापौर और उप महापौर ने मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।
उन्होंने यह भी कहा है कि स्मार्ट सिटी के लिए इस हेराफेरी से प्रदेश को मिलने जा रही स्मार्ट सिटी परियोजना को गंभीर नुकसान हुआ है।