ग्रीन फीस लगाने, शराब सेस बढ़ाने के प्रस्ताव लटके, संपत्तियों की कमाई में से हिस्सा भी नहीं मिला, नक्शों का चार करोड़ भी गया तीन साल में टैक्स 26 फीसदी तक बढ़ा दिया शुल्क कूड़ा शुल्क 30, पार्किंग दरें 32 फीसदी तक बढ़ाईं
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में कांग्रेस शासित नगर निगम में कमाई के लिए उल्टा गियर लग गया है। निगम की कमाई बढ़ने की बजाय घटने लगी है। कमाई बढ़ाने के जहां कई नए प्रस्ताव सरकार के पास अटके पड़े हैं तो नक्शों की फीस जैसे पुराने आय के संसाधन भी निगम के हाथ से चले गए हैं।
हालत यह है कि अपना खजाना भरने के लिए निगम अब शहरवासियों पर बोझ लाद रहा है। तीन साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो शिमला शहर में संपत्ति कर 26.8 फीसदी और कूड़ा शुल्क 30 फीसदी तक बढ़ चुका है। पानी 26 फीसदी तक महंगा हो गया है। पार्किंग की बात करें तो घरेलू पार्किंग की दरें 32 फीसदी तक बढ़ चुकी हैं। 11,328 रुपये वार्षिक शुल्क पर मिलने वाली पार्किंग के लिए अब लोगों को 15 हजार रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। टैक्स और अन्य बिलों में हर साल बढ़ोतरी के बावजूद नगर निगम का खजाना नहीं भर रहा। कर्मचारियों की तनख्वाह के लिए संकट खड़ा हो रहा है। नगर निगम के पास कमाई के पांच बड़े संसाधन टैक्स, पानी, कूड़ा बिल, संपत्तियों का किराया, नक्शों की फीस होती थी। इनमें से पानी की कमाई करीब 32 करोड़ सालाना है जो साल 2018 में ही कंपनी को चली गई। अब इस साल से नक्शों की फीस से मिलने वाला चार करोड़ रुपया भी सरकार के खाते में जा रहा है। कूड़ा बिल से होने वाली करीब एक करोड़ की कमाई कर्मचारियों की तनख्वाह पर खर्च हो रही है। संपत्ति कर और किराये से 30 करोड़ की आय होती है लेकिन उसकी भी पूरी वसूली निगम नहीं कर पा रहा है।
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न ग्रीन फीस शुरू हुई न बढ़ा सेस
नगर निगम ने अपनी कमाई बढ़ाने के लिए राजधानी में बाहरी वाहनों से ग्रीन फीस वसूलने का प्रस्ताव बनाया था। इससे निगम को हर साल 12 से 15 करोड़ की आय होनी है। खास बात यह है कि शहर की जनता पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन कांग्रेस शासित निगम के इस प्रस्ताव को सरकार मंजूरी नहीं दे रही। शराब सेस दो रुपये से 10 रुपये प्रति बोतल करने का प्रस्ताव भी सरकार ने मंजूर नहीं किया। निगम को इससे 3 करोड़ की आय होनी है। बिजली सेस 10 पैसे से बढ़ाकर 20 पैसे प्रति यूनिट करने का प्रस्ताव भी खारिज कर दिया है। यही नहीं निगम को शेयर के तौर पर जो आय होनी थी, वह भी नहीं मिल रही। लिफ्ट से 30 फीसदी शेयर निगम को मिलना है। इससे हर साल करोड़ों की आय होनी है लेकिन पर्यटन निगम ने आज तक एक भी पैसा नहीं दिया। गेयटी की दुकानों से लेकर स्मार्ट सिटी की संपत्तियों तक से निगम को शेयर नहीं मिला है।
जनता पर तीन साल में कितना बोझ पड़ा संपत्ति कर 26.8 फीसदी की बढ़ोतरी कूड़ा शुल्क 30 फीसदी की बढ़ोतरी पानी 26 फीसदी महंगा पार्किंग 32 फीसदी तक महंगी
अहम इनसेट
तनख्वाह पर ज्यादा खर्च, विकास अनुदान सहारे
नगर निगम की सालाना अपने संसाधनों से कमाई करीब 35 करोड़ है। वहीं कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन के लिए निगम करीब 75 करोड़ रुपये सालाना खर्च करता है। केंद्र से मिलने वाले 35 और राज्य सरकार के 32 करोड़ के अनुदान के सहारे न सिर्फ निगम अपना खर्च पूरा कर पा रहा है बल्कि विकास के लिए भी इसी पैसों का सहारा है।
आय बढ़ाने के बनाए हैं प्रस्ताव
महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि निगम ने अब अपनी आय बढ़ाने के प्रस्ताव बनाए हैं। इन पर काम भी चल रहा है। शहर में निगम ने अपना लैंडबैंक तैयार किया है जिस पर दुकानें, व्यावसायिक परिसर आदि तैयार किए जा रहे हैं। शुल्क की रिकवरी बढ़ी है। टैक्स केंद्र के दिशा निर्देश पर ही बढ़ता है जबकि पानी की दरें अब घटने लगेंगी। सब्जी मंडी परिसर बनने से लेकर स्मार्ट सिटी की नई संपत्तियों से निगम की कमाई बढ़ेगी। आने वाले समय में निगम आत्मनिर्भर बनेगा।