हाईकोर्ट ने दोनों परियोजनाओं के तहत की गई पार्किंग व्यवस्था पर जताया असंतोष, विस्तार के निर्देश नगर निगम को पार्किंग के लिए जमीन तलाशने को कहा संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल हाईकोर्ट ने शिमला में प्रस्तावित रोप-वे स्टेशन और बस स्टैंड निर्माण के तहत दी जा रही पार्किंग व्यवस्था पर असंतोष व्यक्त किया है।
अदालत ने कहा कि योजना के तहत तैयार की जा रही पार्किंग क्षमता, शहर की वास्तविक आवश्यकता से काफी कम है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष अलग-अलग प्रतिवादियों द्वारा पार्किंग क्षमता को लेकर आंकड़े पेश किए गए। दायर जवाब के अनुसार, प्रस्तावित रोप-वे स्टेशन पर 1017 वर्ग मीटर का एक पूरा फ्लोर कार पार्किंग के लिए आरक्षित किया है, जिसमें लगभग 50 कारें पार्क की जा सकेंगी। इसके साथ ही स्ट्रक्चर प्लान भी रिकॉर्ड पर लाया गया है। शिमला स्मार्ट सिटी प्रबंध निदेशक द्वारा दाखिल हलफनामे के मुताबिक बस स्टैंड की इमारत की छत पर 18 कारों की क्षमता वाली पार्किंग का निर्माण किया जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने कहा कि दोनों पार्किंग को मिलाकर भी आवश्यक क्षमता से काफी कम हैं। अदालत ने नगर निगम को आसपास जमीन तलाशने के निर्देश दिए हैं। नगर निगम की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत से नया हलफनामा दायर करने के लिए समय मांगा। उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि निगम जल्द ही इस क्षेत्र के आसपास ऐसी जमीन की पहचान करेगा जिसका उपयोग पार्किंग क्षमता बढ़ाने के लिए किया जा सके। नगर निगम की ओर से 7 जुलाई को भी एक हलफनामा दायर किया था जिसमें केवल 30 से 40 वाहनों की पार्किंग का ही जिक्र था। अदालत ने रजिस्ट्री को इस हलफनामे को रिकॉर्ड पर लाने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई अब 26 अगस्त को होगी।