निर्देशों के अनुसार, चुनाव प्रचार या दौरे के दौरान सरकारी वाहनों का इस्तेमाल भी प्रतिबंधित रहेगा। सरकारी कार्यालयों और परिसरों में किसी भी प्रकार के चुनावी होर्डिंग या प्रचार सामग्री लगाने की अनुमति नहीं होगी। आयोग का मानना है कि सरकारी संसाधनों का उपयोग चुनावी लाभ के लिए नहीं होना चाहिए और इस पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
एक अन्य महत्वपूर्ण निर्देश में कहा गया है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी के परिवार का सदस्य चुनाव में उम्मीदवार है, तो संबंधित कर्मचारी को निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होने तक अपने मुख्यालय में ही रहना होगा। ऐसे कर्मचारी अवकाश पर नहीं जा सकेंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी कर्मचारी अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव को प्रभावित न कर सके। मतदाताओं की पहचान को लेकर भी आयोग ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। मतदाताओं को दी जाने वाली पहचान पर्ची केवल सादे सफेद कागज पर होगी। यदि किसी पर्ची पर किसी उम्मीदवार का चुनाव चिह्न या प्रचार सामग्री पाई जाती है, तो नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
चुनावी प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों के शिविर मतदान केंद्रों से कम से कम 100 मीटर की दूरी पर ही लगाए जा सकेंगे। मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाने और वापस ले जाने के लिए किसी भी प्रकार के वाहन या परिवहन सुविधा का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा। आयोग ने उपायुक्तों और संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। किसी भी प्रकार के उल्लंघन की स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
निर्देशों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष रूप से संपन्न हो और मतदाता बिना किसी दबाव या प्रलोभन के मताधिकार का प्रयोग कर सकें। -सुरजीत सिंह राठौर, सचिव, राज्य निर्वाचन आयोग
इसके अलावा अर्बन चैलेंज फंड के तहत पुराने और ऐतिहासिक शहरों के सौंदर्यीकरण, बाजारों के आधुनिकीकरण, मल्टी-लेवल और हाइड्रोलिक पार्किंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जानी हैं। हालांकि, आचार संहिता लागू होने के कारण इन सभी प्रस्तावित योजनाओं पर फिलहाल अमल नहीं हो सकेगा और चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इन्हें गति मिलने की उम्मीद है। उधर, शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि जिन शहरी निकायों में चुनाव हैं, वहां आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है। केंद्र की ओर जारी प्रोजेक्टों में अब 31 मई के बाद ही काम रफ्तार पकड़ेगा। हालांकि, टाइम बाउंड प्रोजेक्टों पर राज्य निर्वाचन आयोग की अनुमति से काम शुरू किया जाएगा।