लंगर, प्रशासनिक व्यय, सामाजिक कार्यों पर खर्च हो रहा मंदिरों का चढ़ावा पैसा : मुकेश
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से अधिग्रहीत मंदिरों के चढ़ावे का उपयोग प्रदेश हिंदू सार्वजनिक धार्मिक संस्था एवं पूर्त विन्यास अधिनियम 1984 (समय-समय पर संशोधित) के अनुरूप खर्च किया जाता है। विधायक केवल सिंह पठानिया के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक, शैक्षणिक, धर्मार्थ प्रयोजन, इमारतों की मरम्मत और नवीनीकरण, सुरक्षा, विद्यार्थियों के प्रशिक्षण तथा धार्मिक संस्थान में आने वाले यात्रियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा व सुविधा के अतिरिक्त मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को लंगर सुविधा, पीने का पानी, शौचालय, सफाई, प्रशासनिक व्यय, सामाजिक कार्यों तथा विकासात्मक कार्यों पर भी पैसा खर्च किया जा रहा है।
वर्ष 2018 में सरकार ने अधिनियम में संशोधन कर प्रदेश के अधिकृत मंदिरों की आय का 15 प्रतिशत गो सदनों के निर्माण, रखरखाव तथा उन्नयन अथवा देसी गायों के संवर्द्धन अथवा विकास के लिए प्रथम चार्ज के रूप में व्यय करने का प्रावधान किया गया है। इस समय प्रदेश के सात मंदिर न्यासों द्वारा अपने गो सदन स्वयं एवं निजी संस्थाओं के सहयोग से संचालित किए जा रहे हैं। श्री माता मंदिर चिंतपूर्णी जिला ऊना, श्री सिद्ध बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध जिला हमीरपुर, श्री भीमाकाली मंदिर व अन्य मंदिर समूह जिला शिमला, श्री राम गोपाल मंदिर डमटाल जिला कांगड़ा, श्री वद्री विशाल मंदिर वाई अटारियां जिला कांगड़ा, श्री महाकाल मंदिर बैजनाथ जिला कांगड़ा और श्री हणोगी माता मंदिर हणोगी जिला मंडी गौ सदन संचालित कर रहे हैं।
अभी शुरू नहीं हुआ धर्मशाला में बस अड्डे का निर्माण
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि धर्मशाला बस अड्डे का निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं किया गया है। अतिरिक्त भूमि को ठेकेदार को सौंपना अभी बाकी है। वन भूमि के एफसीए केस की स्वीकृति के अनुसार ठेकेदार को संशोधित ड्राइंग प्रस्तुत करने को कहा गया है। विधायक केवल सिंह पठानिया के सवाल का लिखित जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इस बस अड्डे के निर्माण के लिए कोई भी धनराशि का प्रावधान नहीं किया गया है।