मुहर्रम के मौके पर शिया मुस्लिम समुदाय के लोगों ने लद्दाखी इमामबाड़े से बालूगंज तक जुलूस निकाला। सिरों पर काली पट्टियां हाथों में जंजीरें लिए हुसैन के दीवानों ने सर्कुलर रोड पर मातम किया। भारी संख्या में बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी जुलूस में शामिल हुए।
हजरत अब्बास की कुर्बानी यादकर आंखों में आंसू लिए मंगलवार को लद्दाखी इमामबाड़ा से सुबह करीब 8 बजे जुलूस निकला। बच्चे, बूढ़े और जवान सभी उम्र के लोग जुलूस में शामिल हुए। मौलाना अब्दुला मातम करते हुए जुलूस में सबसे आगे चल रहे थे।
कंधों पर ताजिया उठा हाथों में अलम थामे जुलूस सर्कुलर रोड गुरुद्वारा और पुराने बस अड्डे होते हुए बालूगंज तक निकला। जुलूस में युवक तेजधार चीजों से अपने बदन को छलनी करते हुए चल रहे थे। किसी के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी। जुलूस के पीछे चल रही औरतें सीनाजनी कर हजरत अब्बास की याद में रो रही थीं।
मौलाना अब्दुला ने बताया कि करबला के मैदान में हुई शहादत का मातम आज भी गम के साथ याद किया जाता है। मुहर्रम के मौके पर इमाम हुसैन के परिवार सहित 72 लोगों को जिसमें 6 महीने का बच्चा अली असगर भी शामिल था करबला के मैदान में शहीद कर दिया था। इसी के गम में मुहर्रम मनाया जाता है।