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हिमाचल: छह देशों के सांसद बोले, तिब्बती जनता के संघर्ष में हम साथ, धर्मशाला में की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस

Fri, 12 Dec 2025 11:09 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला।

सार

दलाई लामा को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने की 36वीं वर्षगांठ, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस और करुणा वर्ष के विशेष अवसर पर छह देशों के संसद सदस्य मैक्लोडगंज पहुंचे हैं। 
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तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने की 36वीं वर्षगांठ, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस और करुणा वर्ष के विशेष अवसर पर छह देशों के संसद सदस्य मैक्लोडगंज पहुंचे हैं। उन्होंने संयुक्त रूप से तिब्बती लोगों के अधिकारों, उनकी संस्कृति और उनके शांतिपूर्ण संघर्ष के प्रति अपनी एकजुटता को दोहराया। इन छह देशों से आए संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। प्रतिनिधिमंडल में चेक गणराज्य की सांसद जित्का सैतलोवा, ऑस्ट्रेलिया की सांसद बारबरा पॉकॉक, चिली के सांसद व्लादो मिरोसेविक, फ्रांस की सांसद सामंथा काजेबोन, न्यूजीलैंड के सांसद ग्रेग फ्लेमिंग और फीजी के सांसद वीरेंद्र लाल शामिल रहे। कार्यक्रम की शुरुआत में केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के अतिरिक्त सचिव और प्रवक्ता तेनजिन लेखश्य ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।

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चेक सांसद जित्का सैतलोवा ने तिब्बती लोगों की पहचान, धर्म और संस्कृति की रक्षा के अधिकार के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि चेक गणराज्य ने भी दमन और अत्याचार का दौर देखा है, इसलिए तिब्बतियों के संघर्ष को गहराई से महसूस करता है। ऑस्ट्रेलियाई सांसद बारबरा पाॅकॉक ने आधिकारिक समारोह में बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रशंसा की। चिली के सांसद व्लादो मिरोसेविक ने दलाई लामा से अपनी मुलाकात का जिक्र करते हुए बताया कि दलाई लामा ने मध्यम मार्ग नीति और चीन तिब्बत संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। फ्रांस की सांसद सामंथा काजेबोन ने कहा कि इस प्रतिनिधिमंडल में उनकी भागीदारी तिब्बत के प्रति समर्थन का स्पष्ट संकेत है। न्यूजीलैंड के सांसद ग्रेग फ्लेमिंग ने कहा कि निर्वासन में तिब्बती समुदाय ने अपनी संस्कृति और धर्म को सराहनीय तरीके से सुरक्षित रखा है। फीजी के सांसद वीरेंद्र लाल ने कहा कि भाषा किसी भी समुदाय की पहचान की नींव है। 
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