हिमाचल में अवैध भवनों को वैध करने वाले विवादित संशोधन टीसीपी बिल के खिलाफ पहली बार किसी नेता ने आवाज उठाई है। भाजपा के वरिष्ठ सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने यह कहकर नई राजनीतिक बहस शुरू कर दी है कि इस विवादित विधेयक पर दोनों पार्टियों को पुनर्विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है राज्यपाल प्रदेश के हित में अच्छा फैसला लेंगे। मजे की बात यह कि कई भाजपा नेता और खुद नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल विवादित विधेयक को पास कराने के लिए राजभवन के चक्कर लगा चुके हैं। जनभावनाओं को नजरअंदाज कर चंद बिल्डरों और कानून तोड़ने वाले रसूखदारों को खुश करने के लिए हिमाचल के सभी राजनीतिक दल हैरानीजनक ढंग से एकजुट हैं।
जबकि आम लोगों में इस बिल को लेकर नाराजगी है। धर्मशाला में शनिवार को प्रेस वार्ता के दौरान शांता कुमार ने अमर उजाला में छपी खबर पर कहा कि टीसीपी विधेयक की आड़ में चार महीने के भीतर प्रदेश में करीब आठ हजार अवैध भवन बना दिए गए हैं। पहले तो प्रभावशाली लोग कानून तोड़ते हैं।
फिर गैर कानूनी तरीके से अवैध निर्माण को वैध करना चिंता का विषय है। वह कौन लोग हैं जिन्होंने पहले कानून तोड़ने दिया। लगता है भारत में कानून तोड़ना ही परम धर्म बन गया है। हालांकि, उनकी पार्टी की राय इस पर और हो सकती है, लेकिन उन्हें लगता है कि इस पर पुनर्विचार होना चाहिए।
शांता ने शौचमुक्त तमगे पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद शांता कुमार ने बेस लाइन सर्वे 2012 के अनुसार हिमाचल प्रदेश को पूर्णतया बाह्ा शौचमुक्त बनाने के लिए प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना की लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठा दिया कि सर्वे 2012 के अनुसार हुआ है। 2012 से 2014 के दौरान बने घरों में शौचालय बने या नहीं इसका आंकड़ा सरकार के पास नहीं है।
कांगड़ा-चंबा के सांसद शांता कुमार ने धर्मशाला में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति ‘दिशा’ की बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपनी-अपनी पंचायतों के पूर्णत: खुला शौचमुक्त होने का बीडीओ से सत्यापित प्रमाणपत्र उन्हें सौंपे जिसके बाद वह अपनी सांसद निधि से उन पंचायतों को 5-5 लाख रुपये की राशि प्रदान करेंगे।
शांता कुमार ने अधिकारियों से वर्ष 2012 के बाद बने नए घरों में शौचालय निर्माण की स्थिति का पता लगाने की दिशा में कार्य करने का भी आग्रह किया। शांता कुमार ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत जिन जगहों पर सार्वजनिक शौचालयों की आवश्यकता है, वहां शौचालयों का निर्माण कार्य प्राथमिकता पर किया जाए। उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने और अति गरीब लोगों तक उनका लाभ पहुंचाने के लिए कार्य करने के निर्देश दिए।
आईएसओ प्रमाण पत्र को आवेदन करें अस्पताल
शांता कुमार ने बैठक में जिला में चल रही विभिन्न विकास योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने मनरेगा योजना के तहत जाने वाले कामों की फील्ड स्तर पर नियमित मॉनीटरिंग पर बल दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत नए संपर्क मार्गों के निर्माण को प्राथमिकता देने की बात कही।
सांसद ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को अगली बैठक में अपने-अपने विभाग से जुड़ी योजनाओं के लाभार्थियों का ब्यौरा देने के निर्देश दिए। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन केन्द्रीय योजनाओं में पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं हुआ है, उसके बारे में विस्तृत नोट बनाकर उन्हें दें। इनके बारे में वह केन्द्र सरकार से बात करेंगे।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को उत्कृष्टता प्रमाण पत्र के लिए भारतीय गुणवत्ता परिषद के पास एवं आईएसओ 9000 के लिए आवेदन करने का सुझाव दिया। उपायुक्त सीपी वर्मा ने कहा कि जिला प्रशासन केंद्र एवं प्रदेश
सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए मिशन मोड पर कार्य कर रहा है। बैठक में डीआरडीओ के परियोजना निदेशक मनीष कुमार, अतिरिक्त उपायुक्त डॉ. रिचा वर्मा सहित गैर सरकारी सदस्य एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।