...अभी उसने दुनिया में कदम रखा ही था कि सिर से मां का साया ही उठ गया। सुनीता पांच दिन से क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में दाखिल थी। तय तारीख 18 जनवरी को दोपहर ठीक ढाई बजे सुनीता का सीजेरियन हुआ। एक स्वस्थ बच्ची ने जन्म लिया। परिजनों ने बेटी के आगमन पर खुशी मनाई। तब तक सब कुछ ठीक था। किसको मालूम था कि जन्म लेने के बाद मासूम को अपनी मां का दूध तक नसीब नहीं होगा।
काफी देर तक जब सुनीता को होश नहीं आया तो परिजनों ने नर्सिंग स्टाफ को इसकी सूचना दी। जच्चा की मौत किन परिस्थितियों में हुई, यह बेशक जांच का विषय है। लेकिन परिजनों की मानें तो कई मर्तबा डॉक्टर को बुलाने के बावजूद सुनीता को देखने कोई नहीं आया। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में मरीजों की जान की क्या कीमत है, इस घटना ने जाहिर कर दिया।