सुंदरनगर के बायला निवासी हेमराज 31 जुलाई, 2013 को दो साल के बेटे, गर्भवती पत्नी और बूढ़े मां-बाप को छोड़कर इराक गया था। अपने परिवार को अच्छा जीवन देने के उद्देश्य से आईएसआईएस के आतंक के बीच एक कंपनी में बतौर कुक काम कर रहा था।
चौदह जून, 2014 को उसने फोन पर परिवार को बताया कि अन्य भारतीयों के साथ आईएसआईएस के आतंकियों ने उसका अपहरण कर लिया है। वे नहीं जानते कि आतंकी उन्हें कहां ले जा रहे हैं। इसके बाद परिजनों का हेमराज के साथ कोई संपर्क नहीं हुआ।
परिवार के सदस्यों ने सांसद रामस्वरूप शर्मा के माध्यम से हेमराज की गुमशुदगी का मामला विदेश मंत्रालय से उठाया था। इसके बाद से इराक में अन्य लापता हुए भारतीयों के साथ उसकी भी तलाश शुरू हुई।
डीएनए के लिए मां-बाप का लिया था खून
गत वर्ष सितंबर में प्रदेश सरकार के माध्यम से हेमराज के माता-पिता का डीएनए लिया गया और इराक में मिले भारतीयों के शवों के साथ इसका मिलान किया गया। गत माह केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सभी लापता 39 भारतीयों की मौत होने की पुष्टि की। इसके बाद लापता हेमराज के जिंदा होने की आस में जी रहे परिवार की आखिरी आस भी टूट गई।