प्रश्नकाल के बाद सदन में प्रस्ताव रखते हुए पठानिया ने कहा कि एक-दो लाख रुपये के लोन लेने वालों को तो बैंक रिकवरी एजेंटों के जरिये धमका रहे हैं। उनका सामान तक घरों से बाहर फेंक दिया जाता है।
लेकिन कई सौ करोड़ का लोन दबाए बैठे लोगों पर कार्रवाई नहीं की जा रही। पठानिया ने बैंक में हुई भर्तियों पर भी एक उदाहरण देकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि नियमों को दरकिनार कर लोन बांटने की वजह से बैंक की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है।
रबीआई दस प्रतिशत से ज्यादा एनपीए होने पर ही बैंक बंद करने की बात कहता है, लेकिन केसीसी बैंक में तो यह आंकड़ा 21 प्रतिशत के पार पहुंच गया है। पिछले चार माह से बैंक की लोन कमेटी की मीटिंग तक नहीं हुई। बैंक पूरी तरह से बैठ गया है। ऐसे में इसकी जांच सीबीआई से कराना आवश्यक है।