ऊना शहर के संजीव (51) की सऊदी अरब में हार्ट अटैक से 24 जनवरी को मौत हो गई थी। 18 फरवरी को उन्हें दफना दिया था। जानकारी मिलने पर परिजनों ने मामले को 19 फरवरी को मीडिया में उठाया, ताकि संजीव की पार्थिव देह स्वदेश लाकर उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से किया जाए।
सऊदी अरब में मौत के 107 दिन बाद बुधवार को संजीव शर्मा को अपने वतन की मिट्टी नसीब हुई। अवशेष हिमाचल प्रदेश के ऊना पहुंचने के बाद हिंदू रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। चिता को संजीव की बड़ी बेटी नैंसी शर्मा ने मुखाग्नि दी। संजीव अपने पीछे तीन बेटियां नैंसी शर्मा, मानसी शर्मा, श्रुति और पत्नी अंजू को छोड़ गए। बुधवार सुबह सात बजे दिल्ली हवाई अड्डा टर्मिनल-दो पर संजीव के अवशेष पहुंचे। यहां से एंबुलेंस से उन्हें ऊना पहुंचाया गया। दोपहर बाद ऊना पहुंचे अवशेष सीधे श्मशान घाट ले जाए गए।
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बता दें कि ऊना शहर के संजीव (51) की सऊदी अरब में हार्ट अटैक से 24 जनवरी को मौत हो गई थी। 18 फरवरी को उन्हें दफना दिया था। जानकारी मिलने पर परिजनों ने मामले को 19 फरवरी को मीडिया में उठाया, ताकि संजीव की पार्थिव देह स्वदेश लाकर उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से किया जाए। शव लाने के लिए विधानसभा समेत कई जगह मामला गूंजा। बाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से शव ऊना लाया गया। संजीव की मौत का समाचार सुनने के बाद उनकी माता ने भी बेटे के गम में करीब दो सप्ताह बाद दम तोड़ दिया था।
केंद्र सरकार ने दी दिल्ली हाईकोर्ट को जानकारी
संजीव कुमार के अवशेष ऊना पहुंचने से पहले केंद्र सरकार ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि अवशेष भारत लाए गए, जिसे परिजनों को सौंपा जा रहा है। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह को केंद्र के वकील रिपुदमन भारद्वाज ने इसकी जानकारी दी। इस पर कोर्ट ने कहा कि परिजनों के लिए यह बड़ी राहत है और अब वे हिंदू रीति रिवाजों से अंतिम संस्कार कर पाएंगे। कोर्ट ने सऊदी अरब के अधिकारियों का आभार जताया और विदेश मंत्रालय के अधिकारी विष्णु कुमार शर्मा के प्रयासों को सराहा। शर्मा ने इसके साथ ही कोर्ट को बताया कि परिजनों को मृतक के नियोक्ता की ओर से भेजी राशि 7 मई को मिल गई।