उनके बाद रमेश ध्वाला को भी योजना बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाया गया है, मगर उन्हें भी सरकारी कोठी नहीं दी गई है। इनके अलावा सरकारी ओहदों पर ताजपोशियां पाने वाले कई अन्य नेता भी कोठियों के लिए कतारबद्ध है, मगर इन्हें आवास देने पर फैसला नहीं हो पाया है।
सूत्रों की मानें तो जीएडी के पास पांच कोठियां बची जरूर हैं, मगर ये इस लायक नहीं हैं कि ये मंत्री का दर्जा पाने वाले वरिष्ठ विधायकों को पसंद आ सकें। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री भी अनुकूल आवास न मिलने पर अब इसमें दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।
कई निगमों-बोर्डों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष तक कोठियां लेने में रुचि ले रहे हैं, मगर सरकार फैसला नहीं ले पा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग के एक अधिकारी की मानें तो यह सब सरकार के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।