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रमजान मुबारक

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मुसलिम समुदाय में इबादत का महीना कहा जाने वाला रमजान का महीना शुरु हो गया है। रमजान की एक माह की अवधि के दौरान समुदाय के लोग नियमित रूप से रोजे (उपवास) रखते हैं। रमजान मुबारक इबादत का महीना है।
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इस माह मुस्लिम समुदाय के लोग रोजे रखेंगे। रमजान के माह में रोजे रखने का मतलब महज भूखा-प्यासा रहना नहीं है। बल्कि यह इंसान की आत्मा में सद्भावनाओं व अच्छाइयों को जगाने की प्रक्रिया है।

इसी वजह से इसे आत्मिक शुद्धि और नेकी का आध्यात्मिक महीना भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस महीने अल्लाह की रहमत के दरवाजे खुल जाते हैं। लिहाजा, इस महीने मुस्लिम समुदाय के लोग अल सुबह से देर रात तक सिर्फ अपने दीन यानी अल्लाह की इबादत में मसरूफ रहते हैं।
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एक माह रोजे रखते हैं मुस्लिम समुदाय के लोग

‌जिला मुस्लिम वेलफेयर कमेटी के प्रधान नसीम मुहम्मद, मुख्य सलाहकार हुसैन अली, अब्दुल रसीद, शफीक अहमद, असलम मोहम्मद और गुलाम महरूऊदीन ने कहा ने कहा कि रोजों के दौरान इंद्रियों को वश में रखना बेहद जरूरी है।

इतना ही नहीं, दूसरों के बारे में बुरा सोचकर, पीठ पीछे बुराई करके अथवा तकलीफ पहुंचाने वाली बात कहकर भी रोजे नहीं रखे जा सकते। लिहाजा यह एक कठिन तप की तरह है।

रमजान की सबसे बड़ी नेअमत कुरआन है। दिलो-दिमाग में एक चिराग की तरह प्रकाशित यह पाक ग्रंथ लाखों मुस्लिमों को मुंह जुबानी याद है। कुरआन की पहली ईशवाणी रमजान के महीने में ही पैगंबर हजरत मोहम्मद (सल्ल) पर नाजिल (उतरी) हुई है। इस लिहाज से रमज़ान और कुरआन का गहरा संबंध है।
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