देश में मंकीपॉक्स संक्रमण के मामले आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं। जिला कांगड़ा में यदि किसी व्यक्ति में मंकीपॉक्स के लक्षण पाए जाते हैं तो उसे आवश्यक जांच और उपचार के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज में बनाए गए विशेष वार्ड में रखा जाएगा। मंकीपॉक्स वायरस की चपेट में आए मनाली से घूमकर दिल्ली लौटे व्यक्ति के संपर्क में अगर प्रदेश का कोई व्यक्ति आया होगा तो परेशानियां बढ़ सकती हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कांगड़ा डॉ. गुरदर्शन गुप्ता ने बताया कि जिले के सभी अस्पतालों को केंद्र से आए दिशा-निर्देश भेज दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। जिला कांगड़ा में अभी किसी व्यक्ति में मंकीपॉक्स के लक्षण नहीं मिले हैं। इस संक्रमण से घबराने की जरूरत नहीं है। जिले में इस तरह के मामले आते हैं तो उनसे निपटने में विभाग पूरी तरह सक्षम है। कहा कि फिलहाल इससे निपटने के लिए किसी तरह की विशेषज्ञों की कमेटी की आवश्यकता नहीं है। जरूरत पड़ने पर ही इसका गठन किया जाएगा।
संक्रमित के संपर्क में आने के बाद 21 दिन में दिखते हैं लक्षण
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार मंकीपॉक्स वायरस से संक्रमित व्यक्ति को तेज बुखार, त्वचा पर चकते, चेहरे, हाथ, पैर, हथेलियों और तलवों तक पड़ते हैं। संक्रमित व्यक्ति को सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकावट, गले में खराश और खांसी आती है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के 21 दिनों के भीतर अगर इनमें से कोई लक्षण दिखाई देता है तो तुरंत चिकित्सीय सलाह लें। मंकीपॉक्स से संक्रमित व्यक्ति को कई अन्य परेशानियां हो सकती हैं। आंख में दर्द या धुंधला दिखना, सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द, पेशाब कम आना, बार-बार बेहोश होना और दौरे पड़ना जैसे दिक्कतें आती हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर होती है, उन्हें अधिक जोखिम होने की संभावना रहती है।