राजधानी शिमला में पीलिया फैलने के लिए जिम्मेदार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट अब मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की जद्द में आ गए हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने प्रारंभिक सबूत मिलने के बाद इस दिशा में जांच खोल दी है। ईडी के शिमला स्थित जोनल कार्यालय ने सिटी पुलिस से पीलिया मामले में दर्ज एफआईआर की प्रति और अन्य रिकॉर्ड मांगा है।
जांच खुलते ही आईपीएच विभाग के अधिकारियों और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के ठेकेदारों पर भी शिकंजा कसता दिख रहा है। सूत्रों के अनुसार ईडी यह भी तलाशने में जुटा है कि इसके पीछे कहीं बड़े नेताओं का हाथ तो नहीं है। बता दें कि शिमला में छह ट्रीटमेंट प्लांट हैं जिनमें से पांच एक ही ठेकेदार के पास हैं।
विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग की जांच को आगे बढ़ाने के लिए मांगे गए इस रिकार्ड के मिलते ही ईडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के ठेकेदारों और आईपीएच के अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुला सकता है। शिमला में छह सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों को गंदा पानी और शहर का सीवरेज साफ करने के लिए स्थापित किया गया है।
1.35 करोड़ में से 35 लाख ही खर्च
पानी साफ होने के बाद आसपास के नालों और खड्डों में मिलाया जाता है। आईपीएच के अफसरों को इसकी निगरानी का जिम्मा सौंपा हुआ है। शिमला पुलिस ने अश्वनी खड्ड को दूषित करने के मामले में मल्याणा ट्रीटमेंट प्लांट का संचालन ठीक से नहीं करने और शिमला शहर में पीलिया फैलने के मामले में एफआईआर दर्ज की है।
इसमें कई गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं। पुलिस को प्रारंभिक छानबीन से ज्ञात हुआ है कि एक ही ठेकेदार के पास पांच सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट हैं। इनके संचालन के लिए ठेकेदार को आईपीएच विभाग से सालाना 1.35 करोड़ रुपये दिए जाते रहे हैं। जांच में पता चला है कि ठेकेदार इस राशि में से 35 लाख रुपये ही ट्रीटमेंट प्लांट पर खर्च करता था।
प्लांट में तैनात कर्मचारियों का भी बोगस रिकार्ड मिला है। ऐसे में ईडी इस पूरे मामले को मनी लॉन्ड्रिंग से जोड़कर देख रही है। ईडी की प्रारंभिक जांच में ठेकेदारों के अलावा आईपीएच विभाग के अधिकारियों के बैंक खातों को भी खंगाला जा सकता है। इसके लिए उनकी संपत्ति और उनके तमाम लेनदेन पर जांच बैठाई जाएगी।
सूबे के सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की होगी जांच
राजधानी शिमला और सोलन में पीलिया फैलने के बाद स्वास्थ्य महकमा हरकत में आ गया है। स्वास्थ्य निदेशालय ने सूबे के सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की जांच करने का फैसला लिया है। प्लांटों में अनियमितताओं पर अब स्वास्थ्य विभाग आईपीएच को एडवाइजरी भी देगा।
प्राकृतिक जल स्रोतों के सैंपल भी जांचे जाएंगे। स्वास्थ्य निदेशक डॉ. डीएस गुरुंग ने बताया कि विशेषज्ञों को भेजकर प्लांटों में कामकाज को देखा जाएगा। कमियों की रिपोर्ट बनाकर आईपीएच को एडवाइजरी दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य निदेशालय ने राजधानी शिमला के पीलिया प्रभावित सभी क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न टीमों का गठन किया है।
ये टीमें प्रभावित क्षेत्रों में स्थित प्राकृतिक जल स्रोतों के पानी का प्रयोग न करने को लेकर लोगों को घर-घर जाकर जानकारी दे रही हैं। इसके अलावा क्लोरीन की गोलियों को भी बांटा जा रहा है। स्वास्थ्य निदेशालय ने प्रदेश के सभी जिलों में तैनात सीएमओ को भी निर्देश जारी कर एहतियात बरतने को कहा है।