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स्मार्ट सिटी बनाने में मोदी सरकार ने फंसाया नया पेच

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केंद्र सरकार ने स्मार्ट सिटी बनाने में नया पेच फंसा दिया है। स्मार्ट सिटी बनाने के लिए राज्यों को भी आधी राशि शहर विकसित करने में खर्च करनी पड़ेगी। केंद्र सरकार एकमुश्त राशि जारी नहीं करेगी। हर साल 100 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। ये नीति सभी राज्यों पर लागू होगी।
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यह राशि पांच साल तक मिलेगी। हिमाचल के लिए कुल 500 करोड़ का प्रोजेक्ट है। इतनी ही राशि प्रदेश सरकार को विकास कार्यों में खर्च करनी पड़ेगी। केंद्र और राज्य सरकार दोनों की भागीदारी से धर्मशाला में स्मार्ट सिटी का निर्माण होगा। केंद्र सरकार ने प्रदेश सरकार को ऑप्शन भी दी है कि वह चाहे तो पीपीपी मोड पर काम करा सकती है। केंद्र सरकार ने स्मार्ट सिटी की गाइडलाइन भी जारी कर दी है।

राज्य सरकार को नहीं थी जानकारी

प्रदेश सरकार के मुताबिक उसे पहले इस तरह के नियमों के बारे में जानकारी नहीं थी। केंद्र सरकार की ओर से आयोजित बैठक में भी यह मामला उठा था। केंद्र सरकार ने इन्हीं नियमों के तहत काम करने की सलाह दी है। हिमाचल की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है। स्मार्ट सिटी में इतनी राशि खर्च करना सरकार के लिए चुनौती है।

हिमाचल के शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा का कहना है कि केंद्र सरकार ने गाइडलाइन में आधा खर्च करने की बात कही है। केंद्र ने हर साल 100-100 करोड़ रुपये देने की बात भी कही है। पहले इस तरह की कंडीशन नहीं थी। धर्मशाला को स्मार्ट सिटी बनाया जाना है। प्रदेश सरकार इसके लिए राशि को लेकर अपने स्तर पर प्रयास कर रही है।
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स्मार्ट सिटी में मिलेंगी ये सुविधाएं

•ट्रांसपोर्ट सुविधा
•24 घंटे पानी
•बिजली व्यवस्था
•पब्लिक पाथ
•चौड़ी सड़कें
•अंडर ग्राउंड डस्टबिन
•स्कूल और पार्क
•आईटीआई, अन्य कोर्स
•पांच साल में 500 करोड़ की राशि देगा केंद्र
•इतनी ही राशि देनी पड़ेगी प्रदेश सरकार को
•अस्पताल का निर्माण
•एक छत के नीचे सुविधाएं (बिजली पानी के बिल जमा कराने)
•वाईफाई, ऑनलाइन सिस्टम
•एक ही आकार के भवन
•हर वस्तु की अलग मार्केट
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