हिमाचल में 26 मई से मनरेगा के काम ठप हो जाएंगे। ग्राम सेवक संघ ने इस दिन से कलम छोड़ आंदोलन करने का फैसला लिया है। समान काम समान वेतन न मिलने पर यह सेवक प्रदेश सरकार से खफा हैं।
इनके हड़ताल पर जाने से पंचायतों में न तो लेबर के लिए मस्टररोल जारी होगा और न ही बिलों की पेमेंट। यह सेवक पंचायतों में हो रहे विकास कार्यों का भी निरीक्षण नहीं करेंगे। हिमाचल में ग्राम सेवकों की संख्या 1081 है।
पंचायतों के विकास कार्यों का काम इन ग्राम सेवकों पर निर्भर रहता है। एक सेवक के पास तीन-तीन पंचायतों का जिम्मा है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष शिवराज ने बताया कि केंद्र सरकार ने इन ग्राम सेवकों की तैनाती की है।
इसके बाद प्रदेश सरकार ने इन कर्मचारियों को पॉलिसी बनाकर अपनी अधीन ले लिया था। 15 जून को ग्रामीण विकास विभाग और इन ग्राम सेवक के बीच एक एग्रीमेंट हुआ था। इसमें सरकार ने 5 साल का कार्यकाल पूरा कर चुके ग्राम सेवकों को दैनिक भोगी और 3 साल का कार्यकाल पूर्ण कर चुके दैनिक भोगियों को नियमित करने का फैसला लिया था।
लेकिन अभी तक अधिकांश ग्राम सेवक को इसका फायदा नहीं हुआ है। ग्राम सेवकों को 242 रुपये दिहाड़ी दी जा रही है, जबकि काम जूनियर इंजीनियर का लिया जा रहा है। बजट में सरकार ने 10 रुपये दिहाड़ी बढ़ाई है।
उधर, पंचायती राज मंत्री अनिल शर्मा ने कहा कि ग्राम सेवकों की मांगों पर विचार किया जा रहा है। इन कर्मचारियों को अनुबंध पर लाया जा रहा है। जल्द ही अन्य मांगों पर विचार होगा।