अब लोगों से घर-घर जाकर पूछा जाएगा कि वे मनरेगा में क्या काम करवाना चाहते हैं? पायलट आधार पर यह योजना हिमाचल के 11 ब्लॉकों में शुरू की जा रही है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत अब बैकवर्ड ब्लाकों को विकास की दृष्टि से विकसित किया जाएगा।
ऐसे ब्लाकों की पंचायतों में वार्ड स्तर पर मनरेगा स्कीमों का खाका तैयार होगा। खाका तैयार करने के लिए हर पंचायत में एक कमेटी का गठन होगा। यह कमेटी पंचायत के प्रत्येक वार्ड में जाकर लोगों के साथ बैठक कर उनकी स्कीमों को लेकर चर्चा करेगी तथा इसी दिन एक उपग्राम सभा भी होगी।
बाद में स्पेशल ग्राम सभा आयोजित कर शेल्फों को तैयार किया जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार ने डीआरडीए के माध्यम से यह नई गाइडलाइन जारी की है। इस गाइडलाइन में देश के करीब 200 जिलों तथा हिमाचल के 11 ब्लाकों को शामिल किया गया है। इसमें कुल्लू जिला के आनी और निरमंड ब्लाकों को शामिल किया गया है।
मनरेगा के तहत बैकवर्ड ब्लाकों के लिए जारी गाइडलाइंस
डीआरडीए कुल्लू में मनरेगा को डील कर रहे विनोद शर्मा ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि वार्ड स्तर पर मनरेगा स्कीमों का खाका तैयार करने के लिए किसी दूसरी पंचायत की गठित कमेटी आएगी। शर्मा ने कहा कि गाइडलाइन में स्कीमों में कोई बदलाव नहीं है, लेकिन स्कीमों को शामिल करने के लिए अलग फॉरमेट होगा। पहले पंचायत स्तर पर ही ग्राम सभा बुलाकर मनरेगा स्कीमों को शामिल किया जाता था। ऐसे में कई लोगों की महत्वपूर्ण स्कीमें छूट जाती थीं।
10 से 12 लोग होंगे कमेटी में शामिल
वार्ड स्तर पर मनरेगा स्कीमों का खाका तैयार करने के लिए बनने वाली कमेटी में 10 से 12 लोगों को शामिल किया जाएगा। इसमें ब्लाक जेई, पंचायत प्रधान, सचिव, युवक मंडल और अन्य संस्था के सदस्यों को शामिल किया जाएगा।
‘इस योजना के लिए हिमाचल के 11 ब्लॉकों का चयन किया गया है। इन ब्लॉकों की ग्राम पंचायतों में वार्ड स्तर पर मनरेगा कार्यों का खाका तैयार होगा। लोगों से घर-द्वार जाकर पूछा जाएगा कि वे क्या काम मनरेगा में करना चाहते हैं।’
- बीडी शर्मा, उपनिदेशक, मनरेगा, ग्रामीण विकास विभाग, हिमाचल प्रदेश