उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय में गुणवत्ता नियंत्रण प्रकोष्ठ की स्थापना की गई है। मुख्यमंत्री ने बहुमूल्य सुझावों के लिए विधायकों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 शानदार वर्ष रहा है।
इस दौरान राज्य के विकास के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो राज्य सरकार अधिक कुशलता के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाने की प्रक्रिया को आउटसोर्स करने पर विचार करेगी।
सीएम ने सुबह के सत्र में किन्नौर और कांगड़ा जिलों के विधायकों के साथ बैठक की अध्यक्षता की। अपराह्न के सत्र में चंबा, ऊना, हमीरपुर और लाहौल-स्पिति जिलों के विधायकों के साथ उनकी प्राथमिकताएं निर्धारित करने को लेकर बैठक ली। इसमें मंत्री, विधायक और सभी प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे।
विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने योजना की बैठक में ऊना में यूनिवर्सिटी बनाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि ऊना व मंडी में यूनिवर्सिटी बनानी प्रस्तावित थी। मंडी में तो खोल दी, लेकिन ऊना को नजरंदाज किया गया।
उन्होंने प्रदेश सरकार की ओर से 4 सौ करोड़ के फॉरेस्ट प्रोस्पैरिटी प्रोजेक्ट को समाप्त करने पर एतराज जताया। उन्होंने कहा कि विधायक प्राथमिकता के 90 करोड़ की सीलिंग हटाई जानी चाहिए, अन्यथा हरोली जैसे हलके जो विकास में अग्रणी चल रहे हैं, उन्हें विकास का पैसा नहीं मिलेगा।
मुकेश अग्निहोत्री ने हिमाचल के सबसे लंबे हरोली-ऊना पुल पर हारे हुए आदमी का नाम लिखने को मर्यादाहीन बताया। इसी तरह सिंचाई की सात करोड़ की योजना पट्टिका पर हारे हुए व्यक्ति का नाम अंकित कर दिया।
उन्होंने जैजों रेल लाइन को मैहतपुर या ऊना के साथ जोड़ने की बात रखी। ऊना से होशियारपुर वाया पंडोगा रेल लाइन बनाने पर जोर दिया। उन्होंने सरकार से हर हालत में सतलुज जल बिजली निगम के एनटीपीसी में विलय रोकने को कहा।
उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि अगर 9 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट मिले तो 3500 करोड़ के कर्ज लेने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि नेशनल हाइवे के 69 प्रोजेक्ट के 65000 करोड़ का क्या हुआ ?
उन्होंने दलील दी कि मोदी की सरकार तो रिजर्व बैंक के रिजर्व हथियाने पर लगी है, ऐसे में बह हिमाचल को क्या दे सकते थे। उन्होंने मुख्यमंत्री से संतुलित विकास की बात कही और खास तौर पर सड़कों की तरफ ध्यान देने को कहा है।