मुख्यमंत्री, मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य अगले विधानसभा सत्र से खाने पर सब्सिडी नहीं लेंगे। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों की सहमति के बाद यह फैसला लिया गया है। धर्मशाला शीत सत्र छोटा है। इसके बाद यह व्यवस्था लागू होगी।
उल्लेखनीय है कि हिमाचल में मंत्रियों और विधायकों के लिए विधानसभा सत्र के दौरान ही भोजन की व्यवस्था रहती है। विधानसभा की कैंटीन में शाकाहारी भोजन के 40 रुपये और मांसाहारी के 50 रुपये लिए जाते हैं। विधानसभा में मिलने वाले खाने पर उपदान सरकार का सामान्य प्रशासन विभाग देता है।
प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम की ओर से शाकाहारी खाने का मूल्य 800 रुपये प्रति प्लेट और मांसाहारी का मूल्य 1000 रुपये प्रति प्लेट है। उधर, माकपा विधायक राकेश सिंघा ने सब्सिडी छोड़ने का समर्थन किया और कहा कि विधानसभा सदस्यों को अन्य भत्ते भी छोड़ने चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। उल्लेखनीय है कि मानसून सत्र के दौरान निशुल्क यात्रा भत्ता बढ़ने के मामले में सिंघा ने हंगामा किया था।