कहा कि सांप के डसने के बहुत मरीज आते हैं, लेकिन फिर भी सुविधाएं नहीं हैं।कई विभागों में पद खाली हैं। यहां से डॉक्टर नए मेडिकल कॉलेजों में ट्रांसफर किए जा रहे हैं। वेंटिलेटरों की हालत खस्ता है। एक्स-रे के लिए दो से तीन दिन लग रहे हैं।
एमआरआई में दस दिन से ज्यादा लग रहे हैं। यह कोई छोटी बात नहीं है। स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार ने कहा कि मेडिकल कॉलेज टांडा में कमियाें को दूर किया जाएगा। रिक्त पद भरने का प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री से समस्याओं को सुलझाने को कहा जाएगा।
टांडा से कुछ समय के लिए डॉक्टरों को अन्य मेडिकल कॉलेजों में भेजा है। टांडा में ट्रॉमा सेंटर का प्रस्ताव केंद्र को भेजा है। नेफ्रोलॉजी अभी आईजीएमसी में ही ठीक से नहीं चल रही है। हाईकोर्ट के आदेश पर टांडा के डॉक्टर को आईजीएमसी भेजा है।
कई विभागों में सुपर स्पेशिएलिटी शुरू की है। न्यूरोलाजी, न्यूरोसर्जरी, कार्डियोलाजी और सीटीवीएस में सुपर स्पेशियलिटी शुरू हो रही है। कहा कि टांडा में 2200 की रोजाना ओपीडी है। 35 से 40 डिलीवरी होती है।
50 से 60 इमरजेंसी आती है। मरीजों को उचित और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सुधार की गुंजाइश हर जगह रहती है। सुधार को लेकर जो सुझाव दिए गए हैं, उन पर अमल किया जाएगा।
टांडा में जो कमियां हैं, वह आज की नहीं हैं। कमियां दूर करने को कहा गया है। कैंसर की मशीनरी लगाई गई है। जल्द स्टाफ भी तैनात होगा। सरकार पूरी क्षमता से टांडा में सुधार करेगी। उन्होंने सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए अफसरों को निर्देश भी दिए।