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जालसू जोत की पहाड़ियों में मिला लापता पायलट का शव

Sun, 30 May 2021 10:31 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, बैजनाथ (कांगड़ा)

सार

48 वर्षीय पायलट रोहित भदोरिया पिछले कुछ वर्षों से अपने बेटे व पत्नी के साथ बीड़ में रह रहे थे। समय-समय पर बिलिंग से उड़ान भरते थे। आठ जनवरी को दोपहर बाद बिलिंग घाटी से उड़ान भरने के बाद रोहित का कुछ पता नहीं चला था।
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रोहित के भाई अरविंदम और दोस्त विक्रम ने शव की शिनाख्त की है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पैराग्लाइडिंग के लिए विश्व प्रसिद्ध बिलिंग घाटी से आठ जनवरी को उड़ान भरने वाले बीड़ में रह रहे दिल्ली के रोहिणी इलाके के पायलट रोहित भदोरिया का शव रविवार को बैजनाथ पहुंच गया। शव गल-सड़ गया है। अस्थि पिंजर के रूप में इसे बोरी में डालकर लाया गया है। शव के पास पायलट का पैराग्लाइडर व कुछ अन्य सामान मिला है। रोहित के भाई अरविंदम और दोस्त विक्रम ने शव की शिनाख्त की है।

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अब सोमवार को टांडा मेडिकल कॉलेज में इसका पोस्टमार्टम होगा। 48 वर्षीय पायलट रोहित भदोरिया पिछले कुछ वर्षों से अपने बेटे व पत्नी के साथ बीड़ में रह रहे थे। समय-समय पर बिलिंग से उड़ान भरते थे। आठ जनवरी को दोपहर बाद बिलिंग घाटी से उड़ान भरने के बाद रोहित का कुछ पता नहीं चला था। उनके परिजनों व प्रशासन ने हेलीकॉप्टर से एक सप्ताह तक तलाश जारी रखी थी। बाद में अप्रैल में उत्तराला गांव के ऊपर जालसू जोत मैं कुछ लोगों को पायलट का सामान मिला था। अब जालसू जोत पर बर्फ पिघलने के बाद गत शुक्रवार को एक व्यक्ति ने बीड़ में जालसू जीत की पहाड़ियों में शव के होने की सूचना दी।

दो पुलिस जवान पवन और गुरवचन तथा बीड़ के पांच युवक घटनास्थल के लिए रवाना हो गए थे। शनिवार को मौसम के अनुकूल न होने पर किसी प्रकार का संपर्क नहीं हो सका था। रविवार दोपहर को इस टीम ने शव को बैजनाथ पहुंचाया। थाना प्रभारी ओम प्रकाश ठाकुर ने बताया कि टांडा मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया जाएगा। उतराला के लोक बहादुर ने 28 मई को प्रशासन को सूचित किया था कि जालसू जोत में किसी पायलट का शव है।  
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अब तक हुई 10 विदेशी पायलटों की मौत
बिलिंग घाटी में आज तक 10 विदेशी पायलट मौत का शिकार हो चुके हैं। एक ब्रिटिश पायलट जेओल किचन का शव आज तक नहीं मिला है। बिलिंग से पायलट के साथ टेंडम उड़ान भरने वाले चंडीगढ़ के एक व्यक्ति की बीड़ के समीप पत्थर में गिरने से मौत हो चुकी है। दो वर्ष पूर्व छोटा भंगाल के 24 वर्षीय पायलट फ्री फ्लायर के तौर पर उड़ान भरने के बाद मौत का ग्रास बन चुके हैं। हालांकि, यह साहसिक खेल घाटी में 80 के दशक में शुरू हो गया था, लेकिन पायलटों की मौतों का सिलसिला 2003 के बाद शुरू हुआ है।

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