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ऐतिहासिक मिंजर मेले पर भी संकट के बादल, इस बार उम्मीद कम

Tue, 30 Jun 2020 10:57 AM IST
अरविन्द ठाकुर पंकज सलारिया, अमर उजाला नेटवर्क, चंबा
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फाइल फोटो
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ऐतिहासिक मिंजर मेले पर इस बार कोरोना की मार पड़ सकती है। वर्तमान हालातों को देखते हुए मेला होना काफी मुश्किल लग रहा है। जिला प्रशासन ने भी मेले को लेकर हामी नहीं भरी है।  स्थिति के हालातों के मद्देनजर मेले का आयोजन होना काफी मुश्किल लग रहा है। इससे पहले प्रदेश के अन्य मेले भी कोरोना की भेंट चढ़ चुके हैं। यह तय माना जा रहा है कि इस बार मेला नहीं होगा। 

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मेला हर साल जुलाई माह के अंतिम रविवार से अगस्त माह के पहले रविवार तक चलता है। आठ दिवसीय इस मेले में जहां करोड़ों का कारोबार होता है। सांस्कृतिक संध्याएं भी होती हैं। इसमें नामी कलाकार प्रस्तुतियां देते हैं। लेकिन इस बार मेले को लेकर स्थिति साफ नहीं है। आमतौर पर मेले की व्यवस्था बनाने के लिए बैठकों का दौर अप्रैल माह से शुरू हो जाता था। मगर इस बार जून माह खत्म होने को है, लेकिन प्रशासन ने एक भी बैठक नहीं बुलाई है। इससे साफ है कि प्रशासन भी मेला करवाने के पक्ष में नहीं है। 

कांगड़ा पर विजय पर प्रतीक है मिंजर मेला
मिंजर मेला 935 ई. में त्रिगर्त (अब कांगड़ा के नाम से जाना जाने वाला) के शासक पर चंबा के राजा की विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि अपने विजयी राजा की वापसी पर लोगों ने धान और मक्का की मालाओं से उनका अभिवादन किया था, जो कि समृद्धि और खुशी का प्रतीक है। 
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एडीसी चंबा मुकेश रेपस्वाल का कहना है कि कोरोना की वजह से इस बार मेला होना मुश्किल है। मेले को लेकर  पहले व्यवस्था बनाने के लिए बैठकें की जाती रही हैं। मगर इस बार कोई भी बैठक नहीं हुए है। अन्य क्षेत्रों में भी कोरोना की वजह से मेले नहीं हो रहे हैं। सरकार के निर्देशों के अनुरूप कार्य किया जा रहा है।

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