हिमाचल प्रदेश सरकार को ये नोटिस भारत सरकार के कार्मिक मंत्रालय की ओर से जारी किया गया है।
केंद्र सरकार ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन) दीपक सानन की चार्जशीट को ड्रॉप नहीं करने के मामले में हिमाचल सरकार से जवाब तलब किया है। केंद्र सरकार ने नोटिस भेजकर हिमाचल सरकार से उस पर कमेंट्स मांगे हैं। केंद्र सरकार ने ये नोटिस राष्ट्रपति भवन की ओर से मामले पर संज्ञान लेने के बाद जारी किया है। मुख्य सचिव पी. मित्रा के बाद हिमाचल के दूसरे वरिष्ठतम आईएएस अधिकारी दीपक सानन ही हैं।
हिमाचल प्रदेश सरकार को ये नोटिस भारत सरकार के कार्मिक मंत्रालय की ओर से जारी किया गया है। पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रधान सचिव राजस्व रहे दीपक सानन को एचपीसीए मामले में आरोपी बनाया गया था। उन पर गलत तरीके से राजस्व स्वीकृतियां देने के आरोप थे। वीरभद्र सरकार ने सत्ता में आने के बाद विजिलेंस ब्यूरो में एचपीसीए पर दर्ज किए गए एक मामले में दीपक सानन को भी आरोपी बनाया।
बाद में भारत सरकार ने उनके खिलाफ इस मामले का चालान कोर्ट में पेश करने की मंजूरी देने से इंकार कर दिया था। इसी आधार पर दीपक सानन ने पिछले वर्ष हिमाचल सरकार को एक पत्र भेजा कि उनके खिलाफ जारी की गई चार्जशीट को ड्रॉप किया जाए।
बार-बार रिमाइंडर भेजे जाने पर भी जब इस चार्जशीट पर हिमाचल सरकार ने गौर नहीं किया तो इस बारे में दीपक सानन ने राज्य सरकार के ही कार्मिक विभाग के माध्यम से ही राष्ट्रपति को मामले में हस्तक्षेप करने को ज्ञापन भेजा। इसी पर राष्ट्रपति भवन ने केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय से जवाब मांगा तो मंत्रालय के संबंधित विभाग ने इस बारे में हिमाचल सरकार को नोटिस भेजा है।
वीरभद्र सरकार के ताकतवर नौकरशाहों के निशाने पर सानन- 1982 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दीपक सानन मुख्य सचिव पी. मित्रा के बाद हिमाचल के दूसरे वरिष्ठतम अधिकारी हैं। पी. मित्रा मई महीने में सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इसके बाद हिमाचल में नए मुख्य सचिव की तैनाती होगी। दीपक सानन को इसी चार्जशीट के कारण मुख्य सचिव पद की रेस से बाहर माना जा रहा है।
अजय मित्तल, विनीत चौधरी, उपमा चौधरी, एआर सिहाग और वीसी फारका बेशक सीएस पद की रेस में माने जा रहे हों, मगर ये सभी सानन से कनिष्ठ हैं। दीपक सानन पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रधान सचिव राजस्व समेत कई पदों पर रहे। वे पूर्व मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल के करीबियों में गिने जाते रहे हैं। इसीलिए वीरभद्र सरकार के ताकतवर नौकरशाहों के निशाने पर हैं।