उधर, पंचायत चुनावों के लिए सोशल मीडिया पर प्रचार ने तेजी पकड़ ली है। लोग फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और ट्विटर पर सक्रिय हो गए हैं। रोस्टर फाइनल न होने के बावजूद इन प्रत्याशियों ने दमखम दिखाना शुरू कर दिया है। राज्य में आगामी दिनों में पंचायतों के चुनाव करवाए जाने हैं। प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। सरकार इन्हें तय समय पर करवाने का एलान कर चुकी है। अभी तक आरक्षण रोस्टर को बेशक अंतिम रूप न दिया गया हो, बावजूद इसके लोग जमा-घटाव में जुट गए हैं कि कौन सी पंचायत आरक्षित हो रही है और कौन सी अनारक्षित होगी। इसी हिसाब से चुनाव प्रचार भी तेज कर दिया गया है।
केस स्टडी
करीब चौदह साल तक ऑस्ट्रेलिया में रहने के बाद अपने घर लौटे राजेंद्र सिंह अब जिला परिषद का चुनाव लड़ना चाहते हैं। उन्होंने रोस्टर फाइनल न होने के बावजूद सोशल मीडिया पर प्रचार शुरू कर दिया है। संधू-मतयाना-क्यार वार्ड से चुनाव लड़ने के लिए सरीवन पंचायत के मझोली गांव के राजेंद्र सिंह ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार शुरू दिया है। हालांकि, अभी आरक्षण रोस्टर फाइनल हुआ है, पर उन्हें उम्मीद है कि यह सीट अनारक्षित होगी।