बताया जा रहा है कि 2011 के बाद खनन लीज का नवीकरण नहीं हुआ है। खनन विभाग की मानें तो 2016 में इस क्रशर को बंद करने के आदेश जारी किए जा चुके हैं।
अब सवाल उठ रहा है कि इसके बावजूद यहां काम कैसे होता रहा। विभाग का दावा है कि इस बीच शार्टटर्म परमिट दिया जाता रहा, लेकिन बंद करने के फरमानों के बीच शार्ट टर्म परमिट पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
2500 टन से अधिक रेत-बजरी का दोहन
खनन विभाग के मुताबिक 2016 में क्रशर बंद करने के फरमान जारी किए गए थे। क्रशर से 2500 टन से अधिक रेत-बजरी का दोहन हुआ है। क्रशर मालिक से 500 रुपये प्रतिटन के हिसाब से जुर्माना वसूला जाएगा।
नियमों की अवहेलना पर कार्रवाई
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिशासी अभियंता आरके नड्डा ने कहा कि नियमों को ताक पर रखकर क्रशर चलाया जा रहा था। क्रशर की बिजली काटी गई थी। बावजूद इसके क्रशर को जेनरेटर के सहारे संचालक चला रहा है। वन और खनन विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर क्रशर को सीज कर दिया गया है।