उत्तर भारत के रमणीय वेटलैंड आसन बैराज में देशी-विदेशी परिंदों की आमद शुरू हो गई है। यह वेटलैंड सुर्खाब पक्षी को सर्वाधिक भाता है। 17 नवंबर तक करीब 2500 रंग बिरेंगे मेहमान जल पक्षी पहुंचे हैं। पक्षियों के कलरव के दृश्य पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। हिमाचल और उत्तराखंड अंतरराज्यीय सीमा क्षेत्र पर यमुना नदी के पास का क्षेत्र वेटलैंड के लिए संरक्षित है।
पक्षियों पर रिसर्च करने वाले विशेषज्ञ हर साल यहां आते हैं। पांवटा से मात्र छह किमी दूर आसन वेटलैंड करीब 20 हेक्टेयर भूमि पर फैला है। बेहद रमणीक आसन बैराज में प्रवासी पक्षियों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। इसलिए आजकल मोटर बोट झील में चलाने पर पाबंदी लगा दी है।
अब तक आसन बैराज में मेलार्ड, लार्ज कोरमोंरट, सुर्खाब, टिक्कड़ी, नील बतख, बेजूर, डूबकीमार बतख, बढ़ी-छोटी मुरगाबी, पिनटेल्स, छोटी कारमोरेंट्स, हेरानस, डुबडुबी, पियारून, कामन पोचार्ड, गेडवेल, नार्दन शावलर, कामन मोरगन, कामन क्रूट, ग्रेट इगरेल, इंडियन पोंड हीरान, गेडवाल, वुडबीकर, किंगफिशर और मेलार्ड प्रजाति के पक्षी झील में पहुंच चुके हैं। हर वर्ष आसन बैराज में सर्दियों के मौसम में 5 से 6 हजार जल पक्षी पहुंचते हैं।
वन विभाग के आरओ जेएस तोमर ने बताया कि अब तक हुई गणना में करीब ढाई हजार से अधिक जल पक्षी यहां पहुंच चुके हैं। अभी और पक्षियों के पहुंचने की उम्मीद है। मेहमान पक्षी झील से उड़कर आसपास क्षेत्र में दूर तक चले जाते हैं। इससे, पक्षियों के शिकार का खतरा रहता है। इसलिए वन विभाग की टीमें मेहमान परिंदों की सुरक्षा के लिए दिन रात पहरा देती रही।