उन्होंने कहा कि साल 2013 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने मानदेय में एक हजार रुपये की बढ़ोतरी करने का लिखित आश्वासन दिया था। लेकिन अभी तक यह बढ़ोतरी नहीं हुई है। इस मांग को लेकर यूनियन दिल्ली में कई बार प्रदर्शन कर चुकी है लेकिन केंद्र सरकार सुध नहीं ले रही।
महंगाई के इस दौर में एक हजार रुपये के मानदेय में गुजारा करना मुश्किल हो गया है। हाल ही में केंद्र सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाओं और आशा वर्करों के मानदेय में बढ़ोतरी की लेकिन मिड डे मील वर्करों के साथ सौतेला व्यवहार किया है।
महंत ने केंद्र सरकार से मिड डे मील वर्करों के मानदेय में पांच हजार रुपये की बढ़ोतरी करने, 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के मुताबिक उन्हें पक्का करने, ग्रेच्युटी व पेंशन सुविधा देने और नौकरी से संबंधित 25 बच्चों की शर्त को हटाने की मांग की है।
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक रोहित जमवाल ने बताया है कि हड़ताल को देखते हुए सभी स्कूलों के मिड डे मील प्रभारियों को एक दिन के लिए बच्चों के लिए भोजन बनाने को वैकल्पिक व्यवस्था करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी स्कूलों में बच्चों को भोजन उपलब्ध करवाना निदेशालय की प्राथमिकता में रहेगा।