यूनियन नेताओं ने कहा कि प्रदेश में 21 हजार के करीब मिड-डे मील कर्मी कार्यरत हैं। उन्हें केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने वाले 1,000 रुपये को मिलाकर मात्र 5,000 रुपये मासिक मानदेय मिलता है। यह मानदेय भी केवल 10 महीनों के लिए दिया जाता है। पिछले 17 वर्षों में केंद्र सरकार ने मिड-डे मील कर्मियों के मानदेय में एक रुपये की भी वृद्धि नहीं की है। यह स्थिति कर्मियों के लिए आर्थिक संकट पैदा कर रही है।
कर्मियों ने हरियाणा की तर्ज पर 7000 रुपये मासिक वेतन की मांग की है। वे 12 माह का वेतन, कर्मचारी भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा, ग्रेच्युटी और पेंशन जैसी सुविधाएं भी चाहते हैं। इसके अतिरिक्त, 20 आकस्मिक अवकाश, दो वर्दियां और समय पर वेतन भुगतान की भी मांग की गई। यूनियन ने 25 बच्चों की शर्त समाप्त करने और जमा दो तक योजना का विस्तार करने की भी अपील की। उन्होंने क्लस्टर योजना के नाम पर छंटनी रोकने की मांग की।
रैली के बाद यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव हिमाचल प्रदेश को मांगपत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने मिड-डे मील कर्मियों की समस्याओं और मांगों को विस्तार से रखा। मुख्य सचिव ने जल्द ही शिक्षा मंत्री से बैठक करने का आश्वासन दिया। हालांकि, प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया। तो प्रदेश भर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा और संघर्ष को व्यापक रूप दिया जाएगा।