उल्लेखनीय है कि एनएच अथॉरिटी ने फरवरी 2014 में मुंबई की ध्रुव कंसलटेंसी कंपनी द्वारा औट-आनी-सैंज हाइवे-305 और सर्वे करवाया है। इसमें घियागी से खनाग के बीच 4.2 किमी लंबी टनल के सर्वे को फाइनल कर इसकी डीपीआर मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजी गई है। परंतु छह साल बाद भी इसकी मंजूरी नहीं मिली है।
स्थानीय निवासी मोहर सिंह ठाकुर, जगदीश ठाकुर, डोला राम, उगम राम, गोविंद सिंह, रंजीत सिंह, ओम प्रकाश तथा लाल सिंह ठाकुर ने कहा कि जलोड़ी टनल राजनीति का शिकार होकर रह गई है। बाह्य सराज के लोगों को प्रदेश सरकार और सांसद राम स्वरूप शर्मा से बड़ी उम्मीदें थीं। उन्होंने कहा कि अब फिर से टनल को लेकर जियोलॉजिकल सर्वेक्षण हो रहा है। केंद्र सरकार को अब जल्दी से टनल की डीपीआर को मंजूरी देनी चाहिए।
भारी बर्फबारी से बंद हो जाता है जलोड़ी दर्रा
सर्दी के मौसम में भारी बर्फबारी होने से पांच से छह माह तक जलोड़ी दर्रा यातायात के लिए बंद हो जाता है। इसके अलावा बरसात में भी कोट व माशनूनाला में भूस्खलन के कारण महीनों तक हाईवे ठप हो ताजा है। इससे बाह्य सराज की 58 पंचायतों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट जाता है। इसके अलावा किन्नौर, कुमारसैन, करसोग और रामपुर के लोग भी जलोड़ी दर्रा होकर आवाजाही करते हैं।
केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण काम करती है। ऐसे में जलोड़ी दर्रा टनल का भी जियोलॉजिकल सर्वेक्षण भी एमआई-17 हेलीकाप्टर में लगे आधुनिक एंटीना से किया जाएगा। इसमें जलोड़ी दर्रा के भीतर पत्थर और पानी की मात्रा का पता लगाया जाएगा। - महेश राणा अधिशासी अभियंता एनएच अथॉरिटी पंडोह