आज की तारीख में मेरे परिवार के पोषण के लिए मेरे काम की कोई जरूरत नहीं है। अपने भाई की मदद से मैं होटल और पर्यटन से जुड़ा व्यापार भी करता हूं। लेकिन मेरा मन इस बात के लिए नहीं मानता कि मैं उस काम से दूर हो जाऊं, जिसने अब तक सैकड़ों लोगों को गुम होने से बचाया है। लोगों को बचाने के लिए मैं कभी किसी से कोई आर्थिक मदद की उम्मीद नहीं करता। मैं जल्द ही पचास साल का होने वाला हूं। मेरे परिवारवाले मुझसे उम्र के इस पड़ाव में उम्मीद करते हैं कि मैं अब पहाड़ों पर चढ़ने-उतरने का काम नहीं करूंगा। लेकिन मेरा शरीर जब तक साथ देगा, मैं इसे नहीं छोड़ने वाला।
मैंने अपने काम को खुद तक सीमित नहीं रखा। सर्च रेस्क्यू ऐंड इन्वेस्टिगेशन नाम से मेरी अपनी टीम है। सैकड़ों लड़कों को मैंने इस काम के लिए प्रशिक्षित किया है। और मैंने सभी को यही सिखाया है कि पेशे में इंसानियत को हमेशा ऊपर रखना। स्वतंत्रता दिवस और हिमाचल दिवस पर मेरे काम के लिए सरकारी अधिकारी मुझे आमंत्रित करके प्रमाण पत्र देते हैं। यह तो ठीक है, लेकिन मैं यह चाहता हूं कि सरकार के लिए उन उपकरणों की व्यवस्था करना ज्यादा जरूरी है, जो गुम हुए लोगों को रेस्क्यू करने में मददगार हों।