बारिश से किसानों और बागवानों के चेहरों पर खुशी आ गई है। हिमाचल के सोलन जिले की अर्की की मीना भी खुश है। मीना इसलिए खुश है कि उसे अब लोगों के खेतों में हल जोतने का मौका मिल जाएगा और परिवार का गुजारा हो सकेगा। मौसम ने उसे उम्मीद बांध दी है कि आसपास के गांव के लोग उसे हल जोतने के लिए बुलाएंगे। इससे मीना कुछ पैसे कमाकर बच्चों के लिए किताबें खरीदेगी और दो वक्त की रोटी का भी जुगाड़ हो जाएगा।
महिला सशक्तीकरण को लेकर सरकारें बेशक हजार दावे करती हों, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही देखने को मिलती है। अर्की की पलोग पंचायत के गांव जयावड़ा में एकल नारी मजदूरी और लोगों के खेतों में हल जोतकर अपने परिवार को पाल रही है। सरकारों की तरफ से मकान बनाने के लिए मीना को 75 हजार की राशि मिली लेकिन इससे आधा-अधूरा मकान ही बन सका। गरीबी इतनी थी कि मीना के सामने अब एक ही रास्ता बचा था। उसने लोगों के खेतों में हल चलाना शुरू कर दिया। अब आसपास के गांवों के लोग भी मीना को हल जोतने के लिए बुलाते हैं। मीना का कहना है कि 45 वर्ष की उम्र के बाद भी उसे न तो पेंशन मिली और न ही बच्चों को किसी सरकारी योजना का लाभ मिल सका।
किस्मत ने मीना के साथ अजीब खेल खेला है। वर्षों पहले उसके माता-पिता का देहांत हो गया। एक बड़ा भाई था, जिसका भी कोई अता पता नहीं है। बकौल मीना हम तीन बहनें थीं, जिसमें से एक का देहांत हो गया। जिसका नौ साल का बेटा और 12 वर्ष की एक बेटी है। दोनों स्कूल में पढ़ते हैं। मीना खुद भी तलाकशुदा है और उसका बेटा है। मां-बेटा दोनों मिलकर मजदूरी करते हैं और परिवार का पालन पोषण करते हैं। इस बारे में कार्यकारी डीसीपीओ सोलन पद्म शर्मा का कहना है कि उनके ध्यान में यह मामला नहीं था। जल्द ही सहायता समूह को महिला के घर भेजा जाएगा। महिला और बच्चों को सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता राशि जल्दी प्रदान करने का प्रयास किया जाएगा।